कटिहार जिले की नियति ऐसी है कि महानंदा और कोसी का जलस्तर बढ़े या घटे लेकिन कटाव का दंश शुरु हो जाता है। फिलवक्त नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद अब धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन इसके साथ ही कई क्षेत्रों में कटाव का खतरा गहरा गया है।
आजमनगर, कुरसेला और कदवा के बलिया बेलौन क्षेत्र में नदी किनारे बसे लोगों की चिंता बढ़ गई है। आजमनगर प्रखंड के औलिया गांव में महानंदा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण कटाव का संकट फिर मंडराने लगा है।
कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता
कुछ दिन पूर्व ग्रामीणों की शिकायत पर कार्यपालक अभियंता पूरी टीम के साथ स्थल पर पहुंचे थे। उनके निर्देश पर कटाव निरोधी कार्य शुरू भी कराया गया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि नदी के बढ़ते दबाव को देखते हुए कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता है।
उनका मानना है कि पर्याप्त संसाधन और मजदूर नहीं लगाए गए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। अंचल पदाधिकारी के निर्देश पर हल्का कर्मचारी रविवार देर शाम तक मौके पर मौजूद रहकर स्थिति का जायजा लेते रहे।
कुरसेला में शुरू हो गया कटाव
उधर, कुरसेला प्रखंड के दक्षिणी मुरादपुर पंचायत अंतर्गत तीनघड़िया गांव में भी कुछ स्थानों पर कटाव शुरू हो गया है। हालांकि जलस्तर में फिलहाल वृद्धि नहीं होने से कटाव की रफ्तार धीमी है।
जानकारों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने और मिट्टी के हवा के संपर्क में आने के बाद कोसी और गंगा नदी के किनारों पर कटाव और तेज हो सकता है। कुरसेला प्रखंड की दक्षिणी मुरादपुर, पूर्वी मुरादपुर तथा शाहपुर धर्मी पंचायत के कई गांव हर वर्ष बाढ़ और कटाव की मार झेलते हैं।
हर साल इस समस्या से प्रभावित
दक्षिणी मुरादपुर पंचायत के खेरिया, तीनघड़िया, बिंदटोली, बालू टोला और पत्थर टोला के अलावा पूर्वी मुरादपुर पंचायत के कमलाकानी व मजदिया तथा शाहपुर धर्मी पंचायत के चाय टोला और शेरमारी गांव के लोग हर साल इस समस्या से प्रभावित होते हैं।
कटाव के कारण किसानों की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में समा चुकी है। इधर, कदवा प्रखंड के बलिया बेलौन क्षेत्र में महानंदा नदी का जलस्तर घटने के बावजूद भौनगर, मेहंदीपुर, आलपोखर और पीपल टोला में कटाव जारी है।
जलस्तर में बढ़ोतरी से कटाव शुरू
बीते शनिवार को जलस्तर में अचानक वृद्धि के बाद इन इलाकों में तेज कटाव शुरू हो गया था। वर्तमान में जलस्तर कम हो रहा है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार भौनगर, मेहंदीपुर और आलपोखर क्षेत्र में करीब पांच से छह मीटर तक उपजाऊ कृषि भूमि नदी में विलीन हो चुकी है।
वहीं शेखपुरा पंचायत के पीपल टोला के समीप लगभग चार मीटर भूमि का कटाव हुआ है। लगातार हो रहे कटाव से किसानों की चिंता बढ़ गई है। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रभावी बचाव उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में कटाव आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।


