पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन से घाटी में मुहर्रम के जुलूसों की अनुमति देने तथा ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के विरोध में प्रदर्शन करने वाले और जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत गिरफ्तार किए गए युवाओं को रिहा करने की अपील की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक जुलूस इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें लोगों की भावनाओं तथा संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए आयोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
इस्लामी नववर्ष का पहला महीना मुहर्रम बुधवार से जम्मू-कश्मीर में शुरू होगा और 10वें दिन, 26 जून को, आशूरा के जुलूस निकाले जाएंगे। महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “मुहर्रम आत्मचिंतन, बलिदान और स्मरण का समय है। इमाम हुसैन द्वारा प्रतिपादित मूल्य आज भी लोगों को न्याय, करुणा और मानव गरिमा के लिए खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। सरकार का दायित्व है कि शोक मनाने वाले लोग इन पवित्र दिनों को स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ढंग से मना सकें।”
मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं
उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि क्षेत्र की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, “मुहर्रम जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए गहरा धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है और प्रशासन को शोक मनाने वालों तथा श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करनी चाहिए।” पीडीपी प्रमुख ने प्रशासन से यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएँ, स्वच्छता, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने का आग्रह किया ताकि धार्मिक सभाएँ और जुलूस सुचारु रूप से आयोजित हो सकें।


