वायुसेना के जितेंद्र शर्मा असम विमान हादसे में बलिदान, शादी की चल रही थी तैयारी; आज अलीगढ़ आएगा पार्थिव शरीर

असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन से शनिवार को आई दुखद खबर ने टप्पल क्षेत्र के गांव सालपुर को गम में डुबो दिया। भारतीय वायुसेना में सार्जेंट के पद पर तैनात गांव के होनहार जितेंद्र शर्मा मालवाहक विमान हादसे में वीरगति को प्राप्त हो गए।

देश सेवा के दौरान हुई उनकी मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। जितेंद्र की ही शादी की तैयारी चल रही थी। लड़की भी पसंद कर गए थे। पिछले माह ही 20 दिन की छुट्टी पर आए थे। पांच जून को ड्यूटी ज्वाइन की थी।

वायुसेना के मालवाहक विमान हादसे में टप्पल के जितेंद्र भी बलिदान

असम के जोरहाट एयरबेस पर शनिवार सुबह लैंडिंग के दौरान वायुसेना का एएन-32 मालवाहक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट सहित पांच वायुसेना कर्मी बलिदान हो गए। सार्जेंट जितेंद्र शर्मा भी उनमें शामिल थे। दोपहर एक बजे वायुसेना की ओर से फोन पर स्वजन को यह दुखद सूचना दी गई। इसके बाद गांव में मातम छा गया।

शादी की तैयारियां चल रही थीं

जितेंद्र शर्मा अविवाहित थे। वायुसेना में एक जनवरी, 2015 को उनका चयन हुआ था। पिता कालीचरण की 2011 मृत्यु हो चुकी है। परिवार में मां राजेश्वरी, भाई रमाकांत व भूपेंद्र हैं। मां को तो रात तक घटना के बारे में नहीं बताया गया था। भाई भूपेंद्र ने बताया कि रविवार को पार्थिव शरीर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर लाया जाएगा। वहां से सड़क मार्ग से गांव पहुंचेगा।

जितेंद्र के बड़े भाई रमाकांत फाइनेंस कर्मी हैं। उनके छोटे भाई भूपेंद्र खेती करते हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। भूपेंद्र ने बताया कि जितेंद्र अलीगढ़ में लड़की भी देखने गए थे, जो पसंद आ गई थी। शादी को फाइनल करने पर बात चल रही थी। इस घटना ने सब कुछ खत्म कर दिया।

केबल काट दी, घर में बाहरी लोगों का प्रवेश किया बंद

बेटा का शव आने से पहले किसी भी तरह मां को सूचना न मिल जाए, स्वजन व गांव वाले इसी प्रयास में लगे रहे। न्यूज चैनलों पर प्रसारित हो रही खबरों को देखते हुए सबसे पहले टीवी की केबल काट दी। मां को बताया गया कि केबिल को बंदर तोड़ गया है, कल तक सही हो पाएगी। यही नहीं स्वजन ने मीडिया कर्मियों व बाहर के लोगों को भी घर में नहीं जाने दिया।

विमान उड़ते देख वायुसेना में जाने का देखा था सपना

जितेंद्र शर्मा ने जब दोस्तों के साथ आसमान में विमानों को उड़ते देखते थे, तो वो एक ही बात कहते थे कि इसमें मुझे भी उड़ना है। भाई भूपेंद्र ने बताया कि सपने को साकार करने के लिए जितेंद्र ने पढ़ाई के दौरान ही तैयारी शुरू कर दी थी।

कानपुर में हुई वायुसेना की भर्ती में पहली ही बार में ही चयनित हो गए थे। जितेंद्र पढ़ने में भी बहुत तेज थे। जो काम मन में ठान लिया, उसे पूरा करके ही दम लिया। इस हादसे ने हमने अपने भाई को ही नहीं खोया, बहुत सी खुशियों को भी खो दिया जो भाई ने दी थीं।

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