दुष्कर्म के दंश से उबरकर लिखी सफलता की इबारत, एक डॉक्टर और 4 बेटियां बनीं टीचर; अब पीड़ितों को दिखा रहीं राह

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दुष्कर्म जैसा आघात अक्सर पीड़िताओं से उनका आत्मविश्वास, सपने और सामान्य जीवन छीन लेता है। सामाजिक तिरस्कार, लोगों के सवाल और मानसिक पीड़ा कई बार उन्हें अवसाद की ओर धकेल देते हैं, लेकिन मुरादाबाद की कुछ बेटियों ने इस दर्द को अपनी नियति नहीं बनने दिया।
परिवार के अटूट भरोसे, मिशन शक्ति केंद्र में मिली मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने खुद को तो संभाला ही, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान भी बनाई। इनमें चार युवतियां सरकारी विद्यालयों में शिक्षक हैं, जबकि एक जार्जिया में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि जो बेटियां कभी डर और खामोशी में जी रही थीं, वही आज दूसरी पीड़िताओं का हौसला बढ़ाने और उन्हें सामान्य जीवन में लौटने की प्रेरणा भी बन रही हैं।
 जिले के पाकबड़ा की एक किशोरी के साथ अप्रैल 2019 में दुष्कर्म हुआ था। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपित की धमकियों और वारदात के सदमे ने उसे मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया। लोगों की बातें और भविष्य की चिंता उसे भीतर ही भीतर परेशान करती थीं। मई से मिशन शक्ति केंद्र में उसकी नियमित काउंसलिंग शुरू हुई।

पहली बार अपने मन का डर खुलकर किया साझा

पुलिस की महिला दारोगा से कई दौर की बातचीत के बाद उसने पहली बार अपने मन का डर खुलकर साझा किया। परिवार ने भी लगातार उसका साथ दिया और यह भरोसा दिलाया कि वारदात उसके भविष्य का फैसला नहीं करेगी।
धीरे-धीरे उसने पढ़ाई पर दोबारा ध्यान केंद्रित किया। डाक्टर बनने का उसका सपना फिर जीवित हुआ। उसने नीट उत्तीर्ण की और विश्व स्वास्थ्य संगठन से मान्यता प्राप्त तथा भारत सरकार से अनुमन्य जार्जिया के मेडिकल कालेज में प्रवेश लिया। पिछले पांच वर्षों से वह वहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है और अगले वर्ष डाक्टर बन देश लौटने की तैयारी में हैं।

मूंढापांडे की एक युवती का सपना 12वीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने का था, लेकिन सितंबर 2015 में गांव के ही एक युवक ने प्रेम का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में शादी से इन्कार कर दिया। इस घटना ने उसका आत्मविश्वास पूरी तरह तोड़ दिया। वह लोगों से मिलना-जुलना छोड़ने लगी। परिवार ने उसे अकेला नहीं छोड़ा और लगातार हौसला बढ़ाया।
मिशन शक्ति केंद्र में कई बार हुई काउंसलिंग ने उसे मानसिक रूप से मजबूत बनाया। उसने फिर से पढ़ाई शुरू की। शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 2022 में सरकारी विद्यालय में शिक्षक बन गई। आज वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है, परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही है और अपने अनुभव के आधार पर दूसरी पीड़िताओं को भी टूटने के बजाय आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

बिलारी की एक युवती ने बताया कि जब उनकी उम्र करीब  17 वर्ष थी, तब उनके पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने घर में अकेला पाकर उनसे दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उन्होंने खुद को कमरे में कैद कर लिया। लोगों से मिलना-जुलना छोड़ दिया। इससे पढ़ाई भी बीच में छूट गई। मिशन शक्ति केंद्र में हुई नियमित काउंसलिंग ने धीरे-धीरे उनके भीतर आत्मविश्वास लौटाया। उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और वर्ष 2022 में सरकारी शिक्षक बन गईं।
आज वह छोटे भाई की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं और माता-पिता का सहारा बनी हुई हैं। इतना ही नहीं, वंचित परिवार की लड़कियों को वह निश्शुल्क शिक्षा देकर उनको सश्क्त बना रही हैं।  इसी तरह की परिस्थितियों से गुजरीं दो अन्य युवतियों ने भी परिवार के सहयोग और लगातार मनोवैज्ञानिक परामर्श के सहारे खुद को संभाला। उन्होंने पढ़ाई पूरी की, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और सरकारी विद्यालयों में शिक्षक बनीं। कभी जिनके सामने भविष्य अंधकारमय दिखाई देता था, वे आज सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।

अब खामोश नहीं, न्याय के लिए बुलंद कर रहीं आवाज

कभी डरी-सहमी रहने वाली ये पीड़िताएं अब पूरी दृढ़ता के साथ न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं। आत्मनिर्भर बनने के साथ उनका आत्मविश्वास भी लौटा है। अब वे अदालत में बेखौफ होकर अपनी बात रख रही हैं। सभी मामलों के आरोपित मुरादाबाद जेल में बंद हैं। जार्जिया में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही युवती भी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया में नियमित रूप से शामिल होती हैं। सभी को भरोसा है कि दोष सिद्ध होगा और कसूरवारों को सजा मिलेगी।

परिवार का भरोसा और संवाद पहली सीढ़ी

मनोविज्ञानी डा. रीना तोमर कहती हैं कि दुष्कर्म जैसी वारदात के बाद समय पर मिला भावनात्मक सहयोग पीड़ित को सामान्य जीवन में लौटने और सपनों को पूरा करने का आत्मविश्वास देता है। काउंसलिंग के दौरान पीड़ितों को पिछले ऐसे केस के बारे में बताते या जरूरत पड़ने पर मिलवाते हैं, जिनसे इच्छाशक्ति के बल पर युवतियां उबरीं और खुद को सशक्त बनाया।

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