जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एचएसवीपी को प्लाट धारक के 15.31 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। एचएसवीपी ने साल 2007 में आवंटित हुए प्लाट को प्रिफ्रेंशियल (पी) श्रेणी में बताकर 15 साल बाद यह रकम प्लाटधारक से वसूल की थी।
आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि पी श्रेणी की नीति प्लाट आवंटन के दो साल बाद साल 2009 में लागू हुई थी, इसलिए उक्त प्लाटधारक से इसके तहत अतिरिक्त राशि वसूल करना नियम विरुद्ध है, यह सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। प्रिफ्रेंशियल (पी) श्रेणी के प्लाट की लोकेशन अन्य सामान्य प्लाटों की तुलना में बेहतर होती है और इनके लिए अतिरिक्त शुल्क (प्रीमियम) लिया जाता है।
आयोग के समक्ष पेश मामले के अनुसार शिकायतकर्ता सुमेश चुघ ने एचएसवीपी से सेक्टर-65 स्थित प्लाट खरीदा था।
साल 2022 में जब वह प्लाट पर निर्माण कराने के लिए एचएसवीपी कार्यालय पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनका प्लाट पी श्रेणी में आता है। एचएसवीपी ने पी श्रेणी के नाम पर 15.31 लाख रुपये अतिरिक्त जमा कराने की मांग कर दी।


