गांव स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में प्रोन्नत किया गया है। लेकिन सूर्यगढ़ा प्रखंड के आयुष्मान आरोग्य मंदिर अलीनगर की स्थिति सरकारी दावों की पोल खोल रही है।
यहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) की पदस्थापना नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। पोखरामा आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सीएचओ सोनम कुमारी सप्ताह में केवल दो दिन सोमवार और गुरुवार को यहां आकर मरीजों का उपचार करती हैं, जबकि शेष दिनों में एएनएम के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होती हैं।
एक कमरे में सिमटी स्वास्थ्य सेवा
आयुष्मान आरोग्य मंदिर अलीनगर आज भी वर्षों पुराने स्वास्थ्य उपकेंद्र के एकमात्र कमरे में संचालित हो रहा है। पांच वर्ष पूर्व इसके नए भवन निर्माण के लिए राशि आवंटित की गई थी, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका।
बताया जाता है कि राशि निकासी के बावजूद भवन का निर्माण नहीं कराया गया। वर्तमान में बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआइसीएल) द्वारा भवन निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन निर्माणाधीन परिसर की देखरेख नहीं होने से वहां ग्रामीण मवेशियों का चारा और ठेला रख रहे हैं।
एएनएम के भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्था
आयुष्मान आरोग्य मंदिर में एक नियमित एएनएम और एक एएनएम (आर) पदस्थापित हैं। हालांकि प्रतिनियुक्त एक अन्य एएनएम को भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सूर्यगढ़ा भेज दिया गया है।
मंगलवार को नियमित एएनएम अवकाश पर थीं, ऐसे में एएनएम (आर) रिंकू कुमारी अकेले मरीजों का इलाज करने के साथ प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों की जांच भी कर रही थीं। गर्मी से राहत के लिए केंद्र में केवल एक स्टैंड फैन उपलब्ध है। बिजली नहीं रहने के कारण एक मरीज को एएनएम को हाथ से पंखा झेलते देखा गया।
आशा की सक्रियता पर भी सवाल
आयुष्मान आरोग्य मंदिर अलीनगर के पोषक क्षेत्र में आठ आशा कार्यरत हैं। मंगलवार को प्रसव पूर्व जांच के लिए केवल एक आशा कार्यकर्ता रानी कुमारी ही एक गर्भवती महिला को लेकर केंद्र पहुंचीं। जबकि अन्य आशाओं को भी अपने-अपने क्षेत्र की गर्भवतियों को जांच के लिए लाना था।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव
केंद्र में न तो शौचालय और बाथरूम की व्यवस्था है और न ही पेयजल उपलब्ध है। स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों को पानी के लिए आसपास के घरों पर निर्भर रहना पड़ता है। परिसर में जंगली घास उगी हुई है, जिससे सांप-बिच्छू निकलने का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके नियमित साफ-सफाई नहीं कराई जा रही है।
सप्ताह में केवल दो दिन होती है जांच
सीएचओ की उपस्थिति वाले सोमवार और गुरुवार को ही किट के माध्यम से हीमोग्लोबिन, मधुमेह, सिफलिस, एचआइवी, यूरिन एल्बुमिन और गर्भावस्था संबंधी जांच की सुविधा उपलब्ध हो पाती है। बाकी दिनों में यह सुविधा प्रभावित रहती है।


