मिडिल ईस्ट तनाव ने भारतीय शेयर बाजार को गिराया, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान पर बंद

गुरुवार 11 जून को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 0.20% या 150.63 अंक गिरकर 73832.55 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, 50 शेयरों वाला निफ्टी 0.23% या 53.35 अंक गिरकर 23161.60 के स्तर पर बंद (Share Market Down) हुआ। आज शेयर बाजार में आई इस गिरावट के पीछे की वजह वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव और अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों में तेज उछाल रहा। इन कारणों से ग्लोबल इक्विटी मार्केट में जोखिम से बचने का माहौल बन गया।

दिन की शुरुआत में, सेंसेक्स 411.16 अंक या 0.55 प्रतिशत बढ़कर 74,394.34 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 112.5 अंक या 0.48 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,327.45 पर पहुंच गया था।

किन सेक्टर्स में तेजी और किसमें गिरावट?

सेक्टर्स की बात करें तो प्राइवेट बैंक, मीडिया और फार्मा में 0.5-2 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि IT इंडेक्स में 1.4% की गिरावट आई। PSU बैंक, रियल्टी, एनर्जी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में से प्रत्येक में 0.5% की गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी पर सबसे अधिक बढ़त वाले शेयरों में ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, M&M और JSW स्टील शामिल रहे, जबकि गिरावट वाले शेयरों में इन्फोसिस, HCL टेक, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस और एटरनल शामिल रहे।

BSE पर ट्रेडिंग के आखिर में, कुल 4,389 शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें से 1,399 शेयरों में बढ़त हुई, 2,785 में गिरावट आई और 205 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। 77 शेयरों ने अपने 52-हफ़्ते के उच्चतम स्तर को छुआ, जबकि 119 शेयरों ने अपने 52-हफ़्ते के निचले स्तर को छुआ। कुल 149 शेयरों ने अपर सर्किट को छुआ, जबकि 192 शेयरों ने लोअर सर्किट को छुआ।

बाजार में क्यों आई गिरावट

शेयर बाजार में आई गिरावट के पीछे मुख्य वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती टेंशन है। अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर नए हमले किए। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर कोई शांति समझौता नहीं हुआ, तो और भी हमले किए जाएंगे। इसके अलावा ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड 1.7 प्रतिशत बढ़कर 94.68 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। और FIIs का भारत के शेयर बाजार में बिकवाली का दौर जारी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 2,124.98 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

क्या बोले एक्सपर्ट?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड, विनोद नायर ने कहा- “हाल ही में US-ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद, तेल की कीमतें कम होने और गिरावट पर खरीदारी (dip-buying) के कारण घरेलू बाजारों में थोड़ी रिकवरी देखी गई। हालांकि, कमजोर होते ग्लोबल माहौल के कारण यह रिकवरी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई। ग्लोबल संकेत मिले-जुले रहे और प्रमुख सेंट्रल बैंक सख्त रुख (hawkish stance) अपनाए हुए हैं। ECB द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद ने लिक्विडिटी कम होने और उभरते बाजारों में फंड के प्रवाह पर इसके संभावित असर को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।”

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