दरभंगा में जब एक शख्स बना सैकड़ों बच्चों की जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट

गरीबी, अशिक्षा और मजबूरियों के कारण जब कई बच्चों का बचपन बालश्रम की भेंट चढ़ जाता है, तब कुछ लोग उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं। दरभंगा जिले के इटवा शिवनगर निवासी अजीत कुमार मिश्र ऐसे ही समाजसेवी हैं, जिन्होंने सैकड़ों बच्चों की जिंदगी को नई दिशा दी है।

150 बाल श्रमिकों को दिलाई आजादी

बाल अधिकारों की रक्षा और बालश्रम उन्मूलन के लिए वर्षों से सक्रिय अजीत मिश्र अब तक करीब 150 बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर उनके पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। सर्वशिक्षा अभियान के माध्यम से उन्होंने 500 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा।

कोसी क्षेत्र में चलाया जागरूकता अभियान

वर्ष 2010-11 में कोसी क्षेत्र के सुपौल, मधुबनी और दरभंगा में विस्थापित लगभग 50 हजार लोगों के बीच बाल पंचायत और माता समिति का गठन कर उन्होंने शिक्षा और बाल अधिकारों के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। इसका परिणाम यह हुआ कि बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू हो सकी।

वकालत से अधिक बच्चों का भविष्य चुना

विधि स्नातक अजीत कुमार मिश्र दरभंगा जिला बार एसोसिएशन के सदस्य हैं। बेहतर आय अर्जित करने के अवसर होने के बावजूद उन्होंने बच्चों के हित में कार्य करना अपना जीवन उद्देश्य बनाया। वे विधि विरुद्ध किशोरों को निशुल्क कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराते हैं।

अपराध के रास्ते से मुख्यधारा तक

अजीत के प्रयासों से कई ऐसे किशोर, जो कभी गंभीर अपराधों में आरोपित थे, आज समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। इनमें से कुछ युवाओं ने सरकारी नौकरी तक हासिल की है। यह बदलाव उनकी मेहनत और मार्गदर्शन का परिणाम माना जाता है।

अनाथ बच्चों को दिलाया पहचान का अधिकार

उन्होंने 40 से अधिक अनाथ एवं निराश्रित बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र, आधार सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज बनवाने में मदद की। बैंक खाते खुलवाकर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाया, जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा आई।

अब बना रहे समाधान का मंच

बच्चों की समस्याओं के समाधान के लिए अजीत ने ‘तरुण निदान’ नाम से एक विमर्श समूह बनाया है। इस मंच के माध्यम से सामाजिक सहयोग से जरूरतमंद बच्चों की सहायता की जा रही है। इसमें समाजसेवियों, प्रबुद्धजनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का सहयोग मिल रहा है।

अनाथ बचपन से खुशहाल परिवार तक का सफर

बिरौल थाना क्षेत्र के अनुसूचित जाति परिवार से आने वाले रामचरण के सिर से बचपन में ही माता-पिता का साया उठ गया था। एक वक्त ऐसा भी था जब वह दो वक्त की रोटी के लिए भटकता था। रिश्तेदारों ने उसकी जमीन तक पर कब्जा कर लिया था।

शिक्षा, घर और परिवार का सपना हुआ पूरा

भटकते रामचरण को जब अजीत मिश्र का साथ मिला तो उसकी जिंदगी बदल गई। अजीत ने उसे इंटर तक पढ़ाई कराई, सरकारी सहायता दिलाई और सामूहिक विवाह कार्यक्रम के तहत उसकी शादी भी करवाई। बाद में उसे रहने के लिए घर भी मिला।

‘अजीत बाबू नहीं होते तो बर्बाद हो जाता’

आज रामचरण अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सम्मानजनक जीवन जी रहा है। भावुक होकर वह कहता है, “अगर अजीत बाबू का साथ नहीं मिलता तो शायद मैं भी नशे की गिरफ्त में आकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेता। उन्होंने मुझे सिर्फ सहारा नहीं दिया, बल्कि जीने का मकसद भी दिया।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *