गंगासागर सेतु प्रोजेक्ट में बड़ा राजफाश, ममता सरकार ने नहीं ली केंद्र से आवश्यक मंजूरी

काकद्वीप व सागरद्वीप के बीच मुड़ीगंगा नदी पर प्रस्तावित गंगासागर सेतु को लेकर बड़ा राजफाश हुआ है।

इस साल पांच जनवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस सेतु का शिलान्यास किया था और निर्माण का ठेका लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को सौंपा था, लेकिन इस परियोजना के लिए आवश्यक केंद्रीय मंजूरी नहीं ली गई थी।

मालूम हो कि मुड़ीगंगा नदी राष्ट्रीय जलमार्ग का हिस्सा है। ऐसे में इसके ऊपर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य के लिए केंद्र सरकार की अनुमति अनिवार्य है।

प्रस्तावित सेतु सागरद्वीप के पूर्वी हिस्से में बनाया जाना है, लेकिन इसके लिए केंद्र से मंजूरी हासिल करने की दिशा में पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया था।

शिलान्यास के समय भाजपा ने आरोप लगाया था कि सेतु निर्माण की वास्तविक मंशा नहीं है। यह केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा है।

सत्ता में आने के एक महीने के भीतर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने केंद्रीय जहाजरानी एवं राष्ट्रीय जलमार्ग मंत्रालय के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित किया। सरकार अब सेतु का निर्माण कार्य जल्द शुरू करना चाहती है।

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