बांबे हाई कोर्ट ने लीलावती अस्पताल चलाने वाले लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की अंतरिम याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।
याचिका में एचडीएफसी बैंक, उसके प्रबंध निदेशक और सीईओ शशिधर जगदीशन और अन्य लोगों को ट्रस्ट और उसके सदस्यों के खिलाफ कोई भी टिप्पणी करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
‘लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट’ ने बैंक से 1,000 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि के मुकदमे में अंतरिम याचिका दायर की थी।
ट्रस्ट का आरोप है कि बैंक और उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया एवं इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर ऐसे बयान जारी किए, जिनसे ट्रस्ट की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए यह कहा कि बयान मानहानि करने वाले नहीं थे और असल में तथ्यों के लिहाज से सही थे। अदालत ने ट्रस्ट पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसका भुगतान एचडीएफसी बैंक को करना होगा।
पीठ ने कहा कि एचडीएफसी बैंक का यह बयान कि ट्रस्ट और उसके ट्रस्टी प्रशांत मेहता पर बैंक का पैसा बकाया है, तथ्यों के आधार पर सही था और इसलिए यह सच बोलने के दायरे में आता है।
हाई कोर्ट ने कहा कि ये बयान सिर्फ इसलिए देने पड़े, क्योंकि एचडीएफसी और उसके वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मीडिया में लगातार लेख प्रकाशित करने का अभियान चलाया जा रहा था।


