देश में ई-रिक्शा और ई-लोडर की भारी मांग, पारंपरिक पैडल रिक्शा का दौर खत्म; लुधियाना इंडस्ट्री ने बदला रुख

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 देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार लगातार विस्तार कर रहा है और इसका सबसे बड़ा प्रभाव ई-रिक्शा तथा ई-लोडर सेगमेंट में देखने को मिल रहा है। बढ़ती ईंधन कीमतों, कम परिचालन लागत और पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते ई-रिक्शा अब देशभर में एक प्रमुख परिवहन साधन के रूप में उभर चुका है।

वहीं पारंपरिक पैडल रिक्शा की मांग लगातार घट रही है। उद्योग जगत के अनुसार पिछले एक दशक में पैडल रिक्शा की बिक्री में लगभग 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। लुधियाना जिसे देश की साइकिल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का प्रमुख केंद्र माना जाता है, अब तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

शहर की कई प्रतिष्ठित कंपनियां ई-रिक्शा और ई-लोडर निर्माण एवं विपणन में निवेश बढ़ा रही हैं और इस क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाश रही हैं। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारत के परिवहन क्षेत्र की दिशा तय करेगी।

लुधियाना की औद्योगिक इकाइयां भी इस बदलाव को अवसर के रूप में देख रही हैं और नई तकनीक, उत्पादन क्षमता तथा अनुसंधान पर निवेश बढ़ा रही हैं। इससे न केवल उद्योग को नई गति मिलेगी बल्कि रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता के बीच ई-रिक्शा और ई-लोडर भारतीय परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की ओर अग्रसर हैं।

मेड इन इंडिया की ओर कंपनियां अग्रसर

एवन साइकिल लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ओंकार सिंह पाहवा ने बताया कि ई-रिक्शा का ट्रेंड देशभर में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पैडल रिक्शा की बिक्री लगातार कम हो रही है, जबकि ई-रिक्शा की मांग हर साल नए रिकार्ड बना रही है।

उनके अनुसार भारतीय ई-रिक्शा निर्माण उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और पहले की तुलना में तकनीकी चुनौतियां भी काफी हद तक कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कुछ इलेक्ट्रिक मोटर और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए उद्योग को चीन पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के चलते आने वाले वर्षों में यह निर्भरता भी काफी कम होने की संभावना है।

उनका मानना है कि ई-रिक्शा न केवल किफायती है बल्कि चालक के लिए भी अधिक सुविधाजनक है, क्योंकि इसमें शारीरिक श्रम कम लगता है। यही कारण है कि पैडल रिक्शा से इलेक्ट्रिक रिक्शा की ओर तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है।

पैडल रिक्शा की डिमांड आधे से कम में सिमटी

नीलम साइकिल के नाम से प्रसिद्ध सेठ इंडस्ट्रियल कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक केके सेठ ने कहा कि ई-रिक्शा और ई-लोडर की बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में पारंपरिक पैडल साइकिल आधारित परिवहन कारोबार लगभग 35 प्रतिशत तक सिमट गया है, जबकि इलेक्ट्रिक सेगमेंट ने तेज गति से विस्तार किया है।

ई-लोडर और ई-रिक्शा क्षेत्र में भविष्य की अपार संभावनाएं हैं। देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन वाहनों की मांग बढ़ रही है, जिससे उद्योग को नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी देशभर में ई-रिक्शा और ई-लोडर की बिक्री कर रही है और भविष्य में इनके निर्यात की संभावनाओं पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

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