प्रतिबंधित आनलाइन गेम खिलाकर ठगी करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड हर पल अपनी टीम के साथ गिरोह के सदस्यों की मानीटरिंग करता है।
अगर किसी का मोबाइल फोन कुछ घंटे सक्रिय नहीं मिला तो ये संकेत माना जाता है कि वह पकड़ा जा चुका है। इसके बाद जो भी डाटा होता है, उसे डिलीट कर दिया जाता है। मोबाइल फोन का एक्सेस मास्टर माइंड के पास रहता है। पुलिस गिरोह के फरार 14 लोगों की तलाश कर रही है।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि पकड़े गए आरोपितों ने बताया कि एक वेबसाइट में सात से 10 हजार सदस्य जुड़े होते हैं। आरोपितों का गिरोह मोहाली, बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना तक फैला है। वहां भी ठगी की गई है।
जब भी गिरोह के सदस्य का मोबाइल फोन कुछ ज्यादा घंटों के लिए सक्रिय नहीं होता है तो ऐसे में मास्टरमाइंड और उनके प्रमुख सदस्य उनके मोबाइल फोन की यूजर आइडी व गेमिंग एप व सट्टे से संबंधित एप आदि जानकारी डिलीट कर देते हैं।
उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क में दो गिरोह एक साथ काम करते हैं। एक गिरोह डिजिटल अरेस्ट समेत अन्य माध्यमों से साइबर ठगी करता है तो दूसरा गिरोह आनलाइन गेम खेलने वालों में ठगी की रकम खपाता है।
ऐसे में ठगी की जाने वाली रकम जिसके खाते में आती है उससे 40 प्रतिशत नकद लेकर 60 प्रतिशत खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। पुलिस टीम ऐसे लोगों की तलाश कर रही है, जिससे अगर खाता ट्रेस हुआ तो 40 प्रतिशत रकम ठगों के पास नकद रहती थी। गिरोह ठगी की रकम को क्रिप्टो और यूएसडीटी में बदल लेते हैं।
इंटरनेट मीडिया के जरिए लोगों को गेम खेलने का देते थे ऑफर
पुलिस आयुक्त ने बताया कि आइलाइन कई गेम भारत में प्रतिबंधित है, लेकिन साइबर ठगों का गिरोह उन गेम की वेबसाइट क्लोन कर इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के माध्यम से विज्ञापन के जरिए आफर देते थे।
इसमें बताया जाता था कि अगर आप इस गेम को खेलेंगे तो पंजीकरण शुल्क का दोगुणा आपके अकाउंट में आ जाएगा। इसके बाद लोग उन प्लेटाफार्म पर आए लिंक को खोलकर अपनी यूजर आइडी व पासवर्ड बनाकर उसे पंजीकरण कर रुपये जमा करते हैं।
रकम विभिन्न बारकोड के माध्यम से ली जाती है, फिर जो बढ़ी रकम उनके अकाउंट में आती है तो उससे गेम व कैसिनो और सट्टा खेला जाता है।
जब वे लोग जीतते हैं तो आरोपितों का गिरोह उन्हें भारत के नोएडा, मुंबई व लखनऊ की टीम के हेड उन्हें अपने बनाए जिलेवार ब्रांच कोड के ग्रुप पर मैसेज व यूजर आइडी के साथ भेजी जाने वाली रकम का संदेश देते हैं। संदेश मिलने पर रकम जीतने वाले को रुपये भेज दिए जाते हैं।
सात माह पहले भी साइबर ठगों के इसी गिरोह के आठ सदस्य गए थे जेल
आनलाइन गेम और सट्टा खिलाने वाले गिरोह की जड़ें कई वर्षों से शहर में फैली हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ये गिरोह संचालित हो रहा है, जो लोगों को घर बैठे प्रतिदिन लाखों कमाने का सपना दिखा फंसाता है।
सितंबर 2025 में भी बर्रा थाने की पुलिस ने इन्हीं प्रतिबंधित गेम के जरिए लोगों से ठगी करने वाले गिरोह के छह सदस्य रतनलाल नगर के हैप्पी टावर स्थित फ्लैट में पकड़े गए थे, जिसका सरगना बीसीए छात्र गुजैनी का सिद्धार्थ विश्वकर्मा निकला था।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि आनलाइन गेमिंग एप और वेबसाइट से ठगी कर कमाई करने वाले एक गिरोह के सरगना सिद्धार्थ विश्वकर्मा, दीपक वर्मा, अक्षय सिंह, हर्ष मिश्रा, उमेश राव, विशाल संखवार, अभिषेक गौड़, प्रवीण दुबे को जेल जेल भेजा गया था।
ये लोग भी दुबई में बैठे गिरोह के मास्टर माइंड के लिए काम करते थे। आरोपितों के म्यूल खातों में रहे 52 लाख फ्रीज कराए गए थे, जबकि जांच में तीन माह में करोड़ों का लेनदेन भी खातों में मिला था।


