उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली विक्रमशिला सेतु पर आखिरकार 35 दिनों बाद वाहनों का आवागमन फिर से शुरू हो गया। रविवार सुबह बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने नवनिर्मित बेली ब्रिज का उद्घाटन किया। इसके साथ ही एक माह से अधिक समय से बाधित यातायात बहाल हो गया और लाखों लोगों को राहत मिली।
विक्रमशिला सेतु पर गाड़ियों की आवाजाही शुरू होते ही लोगों के चेहरे खिल उठे। पिछले 35 दिनों से आवागमन बाधित रहने के कारण यात्रियों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। पुल खुलने के बाद पूरे इलाके में राहत और उत्साह का माहौल देखने को मिला।
मुख्यमंत्री के संकल्प से पूरा हुआ काम
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश और संकल्प के अनुरूप विक्रमशिला सेतु को पुनः जनता के लिए समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण कार्य में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का विशेष योगदान रहा।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के एक आह्वान पर बीआरओ की टीम भागलपुर पहुंची और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर युद्धस्तर पर काम शुरू किया। टीम ने तय समयसीमा के भीतर बेली ब्रिज का निर्माण कर आवागमन बहाल करने में सफलता हासिल की।
16 मई से शुरू हुआ था निर्माण कार्य
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने बताया कि बेली ब्रिज निर्माण का कार्य 16 मई से शुरू किया गया था। क्षतिग्रस्त हिस्से पर चारों बेली ब्रिज सफलतापूर्वक स्थापित किए गए हैं और अब इसे आम जनता के उपयोग के लिए खोल दिया गया है।
उन्होंने बताया कि पुल की सुरक्षा और मजबूती बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी की व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन रात्रि में एक घंटे का ब्लॉक लेकर आवश्यक रखरखाव कार्य किया जाएगा। विशेषज्ञ अभियंताओं की टीम चारों स्पैन की लगातार जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर मरम्मत का कार्य भी करेगी।
सचिव ने कहा कि तकनीकी निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिदिन ड्रोन से वीडियोग्राफी कर संरचना की समीक्षा की जाएगी।
30 नवंबर तक स्थायी समाधान का लक्ष्य
पंकज कुमार पाल ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 30 नवंबर तक क्षतिग्रस्त हिस्सों पर स्टील ट्रस संरचना स्थापित कर सेतु पर स्थायी रूप से आवागमन बहाल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता आम लोगों को जल्द राहत पहुंचाना था। इसी उद्देश्य से जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और बीआरओ की टीम लगातार दिन-रात कार्य में जुटी रही।
उन्होंने बताया कि प्रशासन ने निर्माण कार्य के लिए सभी आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराया, जबकि बीआरओ ने निर्धारित समय के भीतर काम पूरा कर अपनी दक्षता साबित की।
भारी वाहनों के ट्रायल में सफल रहा बेली ब्रिज
डीएम ने बताया कि सात जून से पहले बेली ब्रिज तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। उद्घाटन से पहले पुल पर भारी क्रेन, रोलर और अन्य वजनदार मशीनों के माध्यम से ट्रायल किया गया था। ट्रायल के दौरान संरचना पूरी तरह सुरक्षित और तकनीकी मानकों पर खरी पाई गई, जिसके बाद इसे यातायात के लिए खोलने का निर्णय लिया गया।
3 मई को हुआ था बड़ा हादसा
गौरतलब है कि तीन मई की मध्यरात्रि को विक्रमशिला सेतु के पोल संख्या-133 के समीप करीब 42 मीटर लंबा स्लैब ध्वस्त होकर गंगा नदी में समा गया था। इस घटना के बाद पुल दो हिस्सों में विभाजित हो गया और यातायात पूरी तरह बंद करना पड़ा।
सेतु बंद होने से उत्तर एवं दक्षिण बिहार के लाखों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों की सलाह के बाद सेना और बीआरओ ने क्षतिग्रस्त हिस्से पर चार बेली ब्रिज स्थापित करने का निर्णय लिया था। करीब 35 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार इस वैकल्पिक संरचना पर अब यातायात शुरू हो गया है।


