उत्तराखंड में इबोला वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर, अस्पतालों को विशेष निर्देश

 कांगो और युगांडा में इबोला वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। संभावित खतरे को देखते हुए जनपद के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।

साथ ही संक्रमण की आशंका वाले मामलों की जांच और निगरानी के लिए बेस अस्पताल स्थित माइक्रोबायोलॉजी लैब को भी तैयार रहने को कहा गया है। हालांकि जिले में अभी तक इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है।

ये हैं लक्षण

इबोला वायरस एक गंभीर और जानलेवा संक्रामक बीमारी है, जो हेमोरेजिक फीवर (रक्तस्रावी बुखार) का कारण बनती है। संक्रमित व्यक्ति में अचानक तेज बुखार, खांसी, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, दस्त और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी में मृत्यु दर 50 प्रतिशत या उससे अधिक तक हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इबोला वायरस हवा के माध्यम से नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के रक्त, शारीरिक तरल पदार्थों अथवा संक्रमित वस्तुओं के सीधे संपर्क में आने से संक्रमण फैलता है। संदिग्ध मरीजों के नमूनों को जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) भेजा जाएगा।

मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी एवं माइक्रोबायोलॉजी लैब समन्वयक डॉ. विक्रांत नेगी ने बताया कि इबोला वायरस का कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। मरीज को उसके लक्षणों के आधार पर उपचार दिया जाता है। उन्होंने बताया कि संक्रमण के लक्षण सामने आने में 21 दिन तक का समय लग सकता है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध लक्षण के दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

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