वॉशिंगटन: अमेरिका में आयरन लंग (Iron Lung) की सहायता से जीवन बिताने वाली आखिरी पोलियो मरीज मार्था लिलार्ड का निधन हो गया। उनके निधन के साथ चिकित्सा इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी समाप्त हो गया। मार्था लिलार्ड कई दशकों तक पोलियो के प्रभावों के बावजूद आयरन लंग की मदद से जीवन जीती रहीं और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए प्रेरणा बनीं।
मार्था लिलार्ड बचपन में पोलियो से संक्रमित हुई थीं। संक्रमण के कारण उनकी श्वसन क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई, जिसके बाद उन्हें सांस लेने में सहायता के लिए आयरन लंग मशीन का सहारा लेना पड़ा। उस दौर में पोलियो से प्रभावित कई मरीजों के लिए यह मशीन जीवनरक्षक तकनीक मानी जाती थी।
चिकित्सा विज्ञान में प्रगति और पोलियो टीकाकरण अभियान के कारण आज आयरन लंग का उपयोग लगभग समाप्त हो चुका है। आधुनिक वेंटिलेशन तकनीकों और प्रभावी टीकों की बदौलत दुनिया के अधिकांश देशों में पोलियो के मामलों में भारी कमी आई है। ऐसे में मार्था लिलार्ड का जीवन चिकित्सा इतिहास और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मार्था लिलार्ड की कहानी पोलियो उन्मूलन और टीकाकरण के महत्व को रेखांकित करती है। उनका जीवन इस बात का प्रतीक रहा कि गंभीर शारीरिक चुनौतियों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और चिकित्सा सहायता के सहारे लंबे समय तक सक्रिय जीवन जिया जा सकता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

