महर्षि आश्रम की 33 करोड़ की जमीन 16 करोड़ में बेची, कॉलोनाइजर की काली कमाई के खेल की जांच में जुटी ED

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नोएडा के सेक्टर 110 स्थित महर्षि आश्रम की जमीन को फर्जी तरीके से बेचने के मामले में हो रही ईडी जांच में अब प्राधिकरण भी रडार पर आ गया है। सूत्रों के अनुसार, ईडी को शक है कि फ्लैटों की खरीद-फरोख्त में कलाई कमाई खपाई गई है।

बिल्डर और काॅलोनाइजर भी ईडी और एसआईटी के निशाने पर

ईडी और एसआईटी अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि अधिसूचित जमीन पर बिल्डरों और कालोनाइजरों को फ्लैट और मकान बनाकर बेचने की प्राधिकरण स्तर से अनुमति दी गई थी अथवा नहीं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या प्राधिकरण स्तर से अनुमति देने का प्रविधान है। जांच का दायरा बढ़ा तो आश्रम की जमीन बेचने वाले बिल्डर और काॅलोनाइजर भी ईडी और एसआईटी के निशाने पर आ सकते हैं।

सर्किल रेट के हिसाब से लगभग 33 करोड़ रुपये

बता दें कि स्पिरिचुअल रिजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट की जमीन को कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर तरीके से बेच दिया। करीब 40 बीघा जमीन की कीमत सर्किल रेट के हिसाब से लगभग 33 करोड़ रुपये बन रही थी, लेकिन 16 करोड़ रुपये में बेचा गया।

अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जमीन को 33 करोड़ रुपये से भी अधिक में बेचा गया, लेकिन जमीन के बैनामे में सिर्फ 16 करोड़ रुपये इसलिए दर्शाया गया ताकि सरकार को स्टांप पत्र के रूप में राजस्व कम देना पड़े। बाकी राशि ब्लैकमनी के रूप में दी गई होगी।

दो सब रजिस्ट्रारों से पूछताछ

ईडी को शक है कि महर्षि आश्रम की अन्य जमीन पर बने हजारों फ्लैट व मकानों की खरीद-फरोख्त में भी इसी तरह खेल हुआ होगा। कीमत का ज्यादा हिस्सा का कैश में लेनदान होने का शक है। उसकी जांच में काली कमाई खपाने का चिठ्ठा खुल सकता है। इस मामले ईडी दो लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। निबंधन विभाग के दो सब रजिस्ट्रारों से पूछताछ कर चुकी है। इसमें कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

फ्लैटों के निर्माण की बात सामने आई

सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराए बिना ही आश्रम में करीब 26 हजार फ्लैट व मकान बन गए। नियमानुुसार अधिसूचित क्षेत्र में निर्माण के लिए प्राधिकरण की अनुमति लेना अनिवार्य बिना अनुमति के निर्माण रोकने की जिम्मेदारी भी नोएडा प्राधिकरण की थी। प्राधिकरण की तरफ इन्हें रोकने की कोशिश संबंधित अधिकारियों ने नहीं की। 39 खसरा नंबरों पर फ्लैटों के निर्माण की बात सामने आई है।

इन खसरा नंबरों पर हुआ निर्माण

700 से 715, 723, 724,728, 730 से 735, 745 से 752, 759 से 764, 779,780, 795 से 798 आदि।

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