पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी बगावत के बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोविड काल का नारा ‘दो गज की दूरी’ का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे TMC के बागी विधायकों से दूरी बनाकर चल रही है।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पर्दे के पीछे से इन विधायकों को अलग समूह बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि विधानसभा में उसका राजनीतिक फायदा हो सके।
डर के कारण BJP के सामने आत्मसमर्पण कर रहे विधायक
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि TMC के कई बागी विधायक भ्रष्टाचार के मामलों और जांच एजेंसियों के डर से भाजपा के करीब जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये विधायक डर के कारण भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं। जो लोग अब अलग पार्टी या समूह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उन पर किसी न किसी तरह के भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
पहले ED और CBI का दबाव था, अब CID और बंगाल पुलिस भी सक्रिय हो गई है। ऐसे में ये लोग खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। अधीर रंजन ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई के डर से कई विधायक राजनीतिक संरक्षण तलाश रहे हैं।
दो गज की दूरी से BJP पर तंज
कांग्रेस नेता ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी इन विधायकों को सीधे अपने साथ नहीं जोड़ना चाहती। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के कोविड काल के नारे ‘दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी’ का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि भाजपा जानती है कि अगर वह इन विधायकों को सीधे पार्टी में शामिल करेगी तो यह कोविड संक्रमण जैसा होगा। इसलिए भाजपा ‘दो गज की दूरी’ बनाए रखते हुए इन्हें अलग संगठन बनाने का संदेश दे रही है।अधीर रंजन के मुताबिक, यदि बागी विधायक अलग समूह बनाते हैं तो ममता बनर्जी के लिए विधानसभा में अपनी पसंद का नेता प्रतिपक्ष बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह
दरअसल, पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी TMC अंदरूनी संकट से गुजर रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर पार्टी में खुला विरोध सामने आया है। ममता बनर्जी ने वरिष्ठ विधायक शोवंदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया है। लेकिन TMC के दो बागी विधायकों ने दावा किया है कि उन्हें पार्टी के 80 में से 58 विधायकों का समर्थन हासिल है और वही इस पद के असली दावेदार हैं।
बागी नेताओं का आरोप है कि स्पीकर को सौंपे गए समर्थन पत्रों में उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए। इस मुद्दे ने पार्टी के भीतर तनाव और बढ़ा दिया है।
बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव
हालिया विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर पहली बार राज्य में सरकार बनाई।
वहीं, लंबे समय तक सत्ता में रही TMC सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को महज दो सीटें मिलीं। सबसे बड़ा झटका ममता बनर्जी को तब लगा जब उन्हें भवानीपुर सीट से उनके पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी ने हराया। बाद में शुभेंदु अधिकारी ही राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने।


