शाहपुर प्रखंड के गंगा तटवर्ती लक्षुटोला गांव में खेती का नया प्रयोग किसानों के चेहरे पर मुस्कान लेकर आया है।
पहले जहां खेतों से साल में एक ही फसल ली जाती थी, वहीं अब किसान मटर और छेमी की कटाई के बाद गरमा मूंग की खेती कर अतिरिक्त आमदनी कमा रहे हैं।
खेतों में लहलहाती मूंग की फसल गांव में खेती के बदलते मॉडल की नई कहानी लिख रही है।
मटर के बाद मूंग, एक खेत से दोहरी कमाई
लक्षुटोला के किसानों ने इस बार खाली पड़े खेतों का बेहतर उपयोग करते हुए गरमा मूंग की खेती की है।
मटर और छेमी की फसल कटने के बाद खेतों में मूंग की बुआई की गई।
किसानों का कहना है कि इस प्रयोग से अब एक ही जमीन से दो बार उत्पादन मिल रहा है, जिससे खेती की लागत निकालने के साथ अतिरिक्त लाभ भी हो रहा है।
कटाई से पहले ही किसानों को अच्छे उत्पादन की उम्मीद
खेतों में मूंग की फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी है और पौधों पर लगी फलियों के गुच्छे बेहतर उत्पादन का संकेत दे रहे हैं।
किसानों को उम्मीद है कि प्रति बीघा डेढ़ से दो क्विंटल तक उपज मिल सकती है।
किसानों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए तो उत्पादन और भी बढ़ सकता है।
मिट्टी की सेहत भी सुधार रही मूंग
गरमा मूंग सिर्फ आमदनी का जरिया नहीं बन रही, बल्कि खेतों की उर्वरता बढ़ाने में भी मददगार साबित हो रही है।
किसानों के अनुसार मूंग के पौधों की पत्तियां खेत में ही गिर जाती हैं, जिससे मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है।
इससे अगली फसलों को भी फायदा मिलता है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है।
मचान बनाकर कर रहे फसल की रखवाली
फसल तैयार होने के साथ ही किसानों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। मवेशियों से बचाव के लिए खेतों में मचान बनाए गए हैं।
किसान दिन-रात मचान पर बैठकर निगरानी कर रहे हैं ताकि कोई पशु फसल को नुकसान न पहुंचा सके।
अच्छी पैदावार की उम्मीद ने किसानों को अतिरिक्त सतर्क बना दिया है।
खेती में बढ़ रहा वैज्ञानिक सोच का दायरा
किसान कृपा यादव ने बताया कि पहली बार गरमा मूंग की खेती करने के कारण बीज की मात्रा कम रखी गई थी, जिससे पौधों की संख्या अपेक्षित नहीं रही।
उनका मानना है कि अगले सीजन में वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती की जाएगी तो उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इससे गांव के अन्य किसान भी इस खेती के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया लाभ का सौदा
कृषि वैज्ञानिक डॉ. पी.के. द्विवेदी के अनुसार मूंग किसानों के लिए लाभदायक नकदी फसल है।
कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण इसकी खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
विशेषज्ञों ने किसानों को समय-समय पर रोग नियंत्रण और दवा छिड़काव की सलाह दी है ताकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर बनी रहे।


