भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मीडिया में छपी उन रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्रीय बैंक ने लगभग 12 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर स्वर्ण भंडार बेच दिया है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने भी इसे गलत सूचना बताते हुए साफ किया कि कैंद्रीय बैंक की तरफ से इस तरह का कोई लेन-देन नहीं हुआ है।
केंद्र सरकार की प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) फैक्ट चेक और आरबीआइ की तरफ से अलग अलग प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ब्लूमबर्ग नाम की एजेंसी की तरफ से प्रसारित रिपोर्ट को गलत करार दिया गया है। उक्त रिपोर्ट में कहा गया था कि आरबीआई ने मई 2026 के मध्य तक स्वर्ण बेचकर विदेशी मुद्रा आस्तियों को मजबूत किया हो सकता है।
12 अरब डॉलर सोना बेचने की खबर फर्जी
जबकि आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी सितंबर 2025 के अंत में 13.92 फीसद से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 16.70 फीसद और 22 मई 2026 को 16.85 फीसद हो गई है। भौतिक स्वर्ण स्टॉक भी अपरिवर्तित है।
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 02 मई, 2025 को उसके पास 879.58 मैट्रिक टन सोना था जो 24 अप्रैल, 2026 को 880.52 मैट्रिक टन हो गया है। लेकिन इस दौरान सोने की कीमत में भारी वृद्धि हुई है लिहाजा भंडार का कुल मूल्य 6,91,478 करोड़ रुपये से बढ़ कर 11,33,076 करोड़ रुपये हो गया है। इसके साथ ही आरबीआई ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
RBI ने जारी किए आंकड़ें
आरबीआई के ताजा साप्ताहिक आंकड़ों (22 मई 2026) के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का मूल्य 46,156 करोड़ रुपेय घटकर 10,98,889 करोड़ रुपये रह गया है। यह कमी किसी भौतिक बिक्री के कारण नहीं हुई है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उस सप्ताह सोने की कीमतों में आई गिरावट और रुपये-डॉलर विनिमय दर के प्रभाव के कारण हुई बाजार मूल्यांकन कम होने का नतीजा है। आरबीआई के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भौतिक स्वर्ण स्टाक 880.52 मीट्रिक टन पूरी तरह अपरिवर्तित बना हुआ है।
वैसे दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की तरफ से समय-समय पर स्वर्ण की खरीद-बिक्री होती रहती है। यह विदेशी मुद्रा भंडार के स्तर को बनाए रखने, तरलता प्रबंधन या बाजार स्थितियों के अनुरूप सामान्य रणनीति का हिस्सा होता है। कई विकसित और मजबूत निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों को ऐसे कदम उठाने की जरूरत ही नहीं पड़ती, क्योंकि उनका विदेशी मुद्रा भंडार स्वाभाविक रूप से मजबूत रहता है।
भारत की स्थिति अलग
हाल के महीनों में रूस और तुर्किये के केंद्रीय बैंकों ने स्वर्ण संबंधी समायोजन किए हैं। रूस ने 2025 से युद्ध व्यय के लिए स्वर्ण बेचा है, जिससे उसके भंडार चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गए। तुर्किये ने लीरा की रक्षा के लिए स्वर्ण का उपयोग किया, जिसमें सैकड़ों टन सोने को दूसरे देशों में गिरवी रखना भी शामिल हैं। वैसे ये दोनों देश कई स्तरों पर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भारत की स्थिति अलग है।
आरबीआई पिछले कुछ वर्षों में शुद्ध स्वर्ण खरीदार रहा है। मार्च 2026 तक कुल 880.52 मीट्रिक टन स्वर्ण में से 680 टन से अधिक देश के अंदर रखा गया है, जो आर्थिक संप्रभुता और सुरक्षा की मजबूती का प्रमाण है। सोने की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत का स्वर्ण भंडार रणनीतिक रूप से मजबूत बना हुआ है।
ब्लूमबर्ग के विश्लेषण में मई के मध्य दो सप्ताह में स्वर्ण बिक्री का अनुमान लगाया गया था, जबकि विदेशी मुद्रा आस्तियां बढ़ी थीं। यह अनुमान ईरान संकट, तेल कीमतों में वृद्धि और रुपए पर दबाव से जुड़ा था। लेकिन आधिकारिक आंकड़े इन दावों का खंडन करते हैं।


