हिंद-प्रशांत में बढ़ेगी भारत-ऑस्ट्रेलिया की ताकत, समुद्री सुरक्षा और मुक्त आवाजाही को लेकर बनी सहमति

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा सामग्री और सेवाओं की आपूर्ति से जुड़े समझौते की तैयारी शुरू करने पर सहमति जताई है।

: पश्चिम एशिया संकट और इंडो-पैसिफिक में बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत-ऑस्ट्रेलिया ने समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता पर फोकस किया। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को समुद्री और हवाई मार्गों पर बिना बाधा आवाजाही और बिना किसी रुकावट के समुद्री व्यापार के महत्व पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के बीच हुई बैठक में इन मुद्दें पर चर्चा हुई। दोनों मंत्रियों ने मुक्त, खुले, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की अहमियत पर भी बात की। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच डिफेंस इंडस्ट्री में सहयोग और साझेदारी के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया और इस क्षेत्र में संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत बताई।
दोनों मंत्रियों ने ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक समन्वय का स्वागत किया और समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने के लिए सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
राजनाथ सिंह और मार्ल्स ने क्वाड इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन (आईपीएमसीएस) पहल के लिए अपना मजबूत समर्थन जताया जिसे प्रारंभ में हिंद महासागर क्षेत्र में, साथ ही विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और अभ्यासों के माध्यम से लागू किया जाएगा।
सिंह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में मार्ल्स के साथ अपनी मुलाकात को ‘उत्कृष्ट’ बताया। उन्होंने कहा, ‘हमने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की और इसे और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी आने वाले वर्षों में स्थिर प्रगति करेगी।’
बैठक के बाद राजनाथ सिंह और रिचर्ड मार्ल्स ने घोषणा की कि दोनों देश रक्षा सामग्री और रक्षा सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित एक समझौता ज्ञापन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग में हुई प्रगति और संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप को अंतिम रूप देने के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की।

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