कौशांबी DM के आदेश पर खोदी गई कब्र, महिला का शव गायब देख हैरान रह गए पुलिसकर्मी; कंकाल भी नहीं मिला

 जनपद में हैरान करने वाला वाकया हुआ। तीन माह पूर्व संदिग्ध हाल में मृत महिला का शव कब्र से लापता हो गया। डीएम के आदेश पर संदीपनघाट स्थित श्मशान घाट पर रविवार शाम को कई जगह पुलिस ने खोदाई कराई, लेकिन शव तो दूर कंकाल तक नहीं मिल सका। विवाहिता की मां ने उसके ससुरालियों पर हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने शव गायब होने की रिपोर्ट वरिष्ठ अफसरों को दी है।

सुसुरालवालों पर बेटी के प्रताड़ना का आरोप

पश्चिम शरीरा क्षेत्र के बरैसा निवासी कमलेश कुमारी पत्नी रमेश चंद्र के अनुसार उसने 26 वर्षीय बेटी सुमिला देवी की शादी 21 मई 2021 में कोखराज थाना क्षेत्र के असवां गांव निवासी लाल बहादुर से की थी। आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही ससुरालीजन बेटी को प्रताड़ित किया करते थे। उत्पीड़न से परेशान बेटी दो वर्ष तक मायके में ही रही। बाद में ससुराली किसी तरह मान-मनौव्वल कर उसे अपने साथ ले गए।

मां ने डीएम से शव के पोस्टमार्टम की मांग की थी

कमलेश कुमारी के मुताबिक करीब तीन महीने पहले ससुराल में सुमिला की संदिग्ध हाल में मौत हो गई। गंगा नदी के किनारे संदीपनघाट में शव दफन किया गया। कमलेश के मुताबिक तभी उसने हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन उसकी नहीं सुनी गई। इसे लेकर पीड़िता ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर दफन शव का पोस्टमार्टम कराने व ससुरालियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

मौत के बाद सुमिला का बेटा उसके मायके में रहता है

इंस्पेक्टर कोखराज सीबी मौर्य का कहना है कि सुमिला देवी का एक बेटा भी है। उसकी मौत के बाद बच्चा मायके पक्ष के लोगों के साथ रहता है। अंतिम संस्कार ससुराल व मायका पक्ष की मौजूदगी में हुआ था। सुमिला के बच्चे को लेकर ससुराल व मायके पक्ष के बीच मतभेद होने पर दफन शव को कब्र से निकलवा कर पोस्टमार्टम कराने की मांग की गई थी।

तीन माह में भूले कहां दफनाया गया था शव

कोखराज इंस्पेक्टर का कहना है कि मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में ससुराल व मायके पक्ष के लोगों का वीडियोग्राफी में बयान लिया गया है। दोनों पक्ष ने जहां शव दफन किए जाने की बात बताई, वहां पर खोदाई कराई गई। वहां कंकाल तक नहीं मिला। एक अन्य जगह भी खोदाई कराई गई, जहां पुरुष का कंकाल मिला। दोनों पक्ष यह भूल गए थे कि शव आखिर कहां दफन किया गया। गंगा घाट किनारे स्थानीय लोग भी यहां अंतिम संस्कार करते हैं। इस लिहाज से पूरा कछार खोदवाना संभव नहीं था।

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