सीमांचल क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल मक्का इस बार रेलवे के लिए भी बड़े मुनाफे का जरिया बनने जा रही है। मक्का के रकवा में बढ़ोतरी के साथ ही रेलवे को इस सीजन में आमदनी में और वृद्धि की उम्मीद है। यही कारण है कि कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर एक और रैक प्वाइंट बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
पिछले साल रेलवे को हुआ था बड़ा फायदा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष केवल पूर्णिया जंक्शन से ही बांग्लादेश सहित दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों को कुल 59 रैक मक्का भेजा गया था। इससे रेलवे को लगभग 40 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी। इस बार मक्का उत्पादन और व्यापार में बढ़ोतरी को देखते हुए रेलवे को लगभग 50 करोड़ रुपये तक की आय होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
तीन रैक प्वाइंट से हो रहा संचालन
पूर्णिया जिले में वर्तमान में कटिहार रेल मंडल के अंतर्गत तीन रैक प्वाइंट सक्रिय हैं। इनमें रानीपतरा, पूर्णिया जंक्शन और जलालगढ़ स्टेशन शामिल हैं। पिछले वर्ष इन तीनों रैक प्वाइंट से लगभग 150 रैक मक्का का परिवहन किया गया था, जिससे रेलवे को 1 अरब रुपये से अधिक की आमदनी हुई थी।
अररिया में भी बढ़ रही व्यवस्था
कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर अररिया जिले में पहले से दो रैक प्वाइंट चालू हैं। अब इस क्षेत्र में एक और रैक प्वाइंट जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे मक्का परिवहन की क्षमता और बढ़ सके। पूर्णिया जंक्शन से इस सीजन में मक्का की एक रैक पहले ही बांग्लादेश भेजी जा चुकी है, जबकि अन्य स्थानों के लिए बुकिंग प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
रेलवे की तैयारियां तेज
पूर्णिया जंक्शन के स्टेशन प्रबंधक मुन्ना के अनुसार रेलवे व्यवसायियों को बेहतर सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि रैक समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। रेलवे की ओर से लोडिंग और परिवहन प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
कई राज्यों तक पहुंच रहा मक्का
पूर्णिया जिला न केवल कटिहार रेल मंडल बल्कि समस्तीपुर रेल मंडल के अंतर्गत भी आता है। इस क्षेत्र में भी कई रैक प्वाइंट सक्रिय हैं, जिनमें सरसी रैक प्वाइंट प्रमुख है। यहां से मक्का बांग्लादेश के अलावा दक्षिण भारत, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों तक भेजा जाता है।
इस बार बढ़ा मक्का का रकवा
इस वर्ष पूर्णिया जिले में सवा लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मक्का की खेती की गई है। इसके अलावा कटिहार, अररिया और किशनगंज जिलों में भी मक्का के रकवा में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मक्का उत्पादन बढ़ने के साथ ही परिवहन और व्यापार की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।
अप्रैल-मई में तेज होती है रफ्तार
रेलवे अधिकारियों के अनुसार हर साल अप्रैल के अंतिम सप्ताह से मक्का परिवहन की रफ्तार तेज हो जाती है। मई माह के दौरान लगभग हर रैक प्वाइंट से लगातार मक्का की रैक विभिन्न राज्यों और देशों के लिए रवाना होती हैं। मक्का उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ रेलवे की आमदनी भी लगातार बढ़ रही है। नए रैक प्वाइंट की तैयारी से न केवल व्यापारियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि रेलवे की आय में भी और वृद्धि होने की संभावना है।


