राजस्थान उच्च न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे 86 वर्षीय संत आसाराम को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।
हालांकि न्यायालय ने उन्हे सामृहिक दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया। लेकिन अन्य गंभीर आरोपो में दोषसिद्धि और सजा यथावत रखी गई है। उच्च न्यायालय ने आसाराम को सरेंडर करने का आदेश भी दिया है। आसाराम इनदिनों अंतरिम जमानत पर हैं।
सजा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं
राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर स्थित मुख्यपीठ में न्यायाधीश अरूण मोंगा और न्यायाधीश योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने बुधवार को आसाराम सहित तीन आरोपितों की ओर से दायर अपीलों पर फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में नीचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सामृहिक दुष्कर्म से जुड़े आरोपों पर विचार करते हुए आसाराम को उस विशेष आरोप से राहत दी है। न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सामृहिक दुष्कर्म की धारा में दोष सिद्ध नहीं होता , लेकिन अन्य आरोप पर्याप्त रूप से साबित होते हैं। इस कारण उनकी बाकी की सजाएं और दोषिसिद्धि बरकरार रखी जाती है।
दरअसल,सजा के खिलाफ आसाराम,सह अभियुक्त शिल्पी और शतचंद्र ने उच्च न्यायालय में अपील की थी। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने 20 अप्रैल,2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। उच्च न्यायालय ने बुधवार को फैसला सुनाया है।सह आरोपित शिल्पी एवं शरतचंद्र को बरी कर दिया है।
पीड़ित पक्ष के वकील पी.सी.सोलंकी ने कहा,आसाराम को सामृहिक दुष्कर्म और आपराधिक षडयंत्र मामले में दोषमुक्त किया गया,शेष की सजा यथावत रहेगी। जनवरी,2023 में गुजरात के गांधीनगर आश्रम में एक महिला से दुष्कर्म के मामले में आसाराम को पहले ही आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है।
यह है मामला
21 अप्रैल 2013 को जोधपुर महिला पुलिस थाने में एक नाबालिग ने आसाराम पर अपने आश्रम में दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया था। 31 अगस्त,2013 को इंदौर के एक आश्रम से आसाराम को गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने नवंबर,2013 न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।
लंबी सुनवाई के बाद विशेष सत्र न्यायालय ने 25 अप्रैल 2018 में आसाराम को दोषी करार देते हुए उम्रकैद एवं शिल्पी और शरतचंद्र को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी । इस फैसले के खिलाफ आसराम,शिल्पी एवं शरतचंद्र ने उच्च न्यायालय में अपील की थी,जिस पर लंबी सुनवाई के बाद बुधवार को फैसला सुनाया गया है।
इस दौरान आसाराम को पहली बार सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी,2025 में अंतरिम चिकित्सा जमानत दी,27 अगस्त 2025 को जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका खारिज की गई थी। 29 अक्टूबर,2025 को उच्च न्यायालय ने छह माह की चिकित्सा जमानत दी,फिर 8 दिसंबर, 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत रद करने की याचिका खारिज करते हुए उच्च न्यायालय को तीन माह में अपील पर फैसला सुनाने के निर्देश दिए ।
HC का तत्काल सुनवाई से इनकार
15 अप्रैल, 2026 को आसाराम की ओर से चिकित्सा कारणों से जमानत अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन दायर किया गया। 16 अप्रेल,2026 को उच्च न्यायालय ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया। 17 अप्रैल,2026 को सजा स्थगित करने संबंधित याचिका पर आसाराम के वकीलों की दलीलें पूरी हुई। 20 अप्रेल,2026 को पीड़ित पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।


