घर पहुंचते ही मोबाइल बन जाते हैं ‘खिलौना’, परेशानी में संपर्क भी ‘नामुमकिन’, हाफराडा पायिन में दम तोड़ते सरकारी दावे

ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी के संबंध में सरकारों के बड़े-बड़े दावे कुपवाड़ा की ताराथपोरा तहसील के दूरदराज के गांव हाफराडा पायिन में धराशायी हो गए हैं, जहां घाटी में इसकी शुरुआत से ही अधिकारियों ने यहां के लोगों को मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में नाकामयाबी हासिल की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में कम से कम दो सौ परिवार और दो हजार से अधिक आबादी है, लेकिन उन्हें दूरसंचार के सबसे बुनियादी अधिकार से वंचित रखा गया है, जिससे निवासी बेसहारा हो गए हैं। मोबाइल उपयोगकर्ताओं ने बताया कि उन्हें अपने मोबाइल फोन में सिग्नल पाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और तभी वे काल कर और रिसीव कर पाते हैं।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा आपात स्थिति में लोगों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और वह तुरंत अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पाते हैं। इलाके के एक सरकारी कर्मचारी ने बताया, घर पहुंचते ही हमारे मोबाइल फोन किसी काम के नहीं रहते। शाम के समय वह सिर्फ खेलने के उपकरण बनकर रह जाते हैं।’

इंटरनेट सुविधा न होने से छात्र परेशान

यहां के छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है क्योंकि उनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। छात्रों के एक समूह ने बताया कि वे विभिन्न एसएसआरबी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन मोबाइल कनेक्टिविटी की कमी के कारण वह आपस में बात करके अपने संदेह दूर नहीं कर पा रहे हैं।

एक नौकरी के इच्छुक छात्र ने कहा, हमारे गांव में इंटरनेट चलाना वर्षों से एक दूर का सपना ही रहा है।निवासियों ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को जिला प्रशासन के संज्ञान में कई बार लाया है, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। अब उन्होंने नव नियुक्त उपायुक्त कुपवारा श्रीकांत बालासाहेब सुसे से इस संबंध में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ताकि उनकी शिकायतों का जल्द से जल्द निवारण किया जा सके।

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