ट्रेन के रुकने का इंतजार, रात को शूटिंग, पेड़ों के पीछे दिया संगीत; 95 साल पहले ऐसे हुई पहले गाने की शूटिंग

भारतीय सिनेमा में जितना प्यार फिल्मों को मिला है, उतना ही प्यार उन फिल्मों के संगीत से भी किया गया है। अब तो मानो हर फिल्म की रूह उसके संगीत को ही माना जाता है। फिल्मों में अगर संगीत ना हो तो मानो वह फिल्में अधूरी सी लगती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा का पहला गाना कौन सा था? इस गाने की कहानी क्या थी? आज बात इसी की…

95 साल पहले आया पहला गाना

अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि जिन गानों पर असल में हम झूमते हैं और डांस करते हैं आखिर उन्हीं गानों की सिनेमा में कहानी क्या है? फिल्मों का पहला गाना (First Song of Bollywood) क्या था, तो इसका जवाब है कि सिनेमा का पहला गाना साल 1931 में आया था।

जी हां, भारतीय सिनेमा का पहला गाना है, ‘दे दे खुदा के नाम पर प्यारे, ताकत हो गर देने की…’। यह गाना साल 1931 में रिलीज हुई भारत की पहली बोलती फिल्म (Talking Movie) ‘आलम आरा’ (Alam Ara) का है। इसी गाने को सिनेमा का पहला गाना कहा जाता है।

सिंगर नहीं एक्टर ने गाया था गाना

इस गाने को किसी पेशेवर सिंगर ने अपनी आवाज नहीं दी थी। उस दौर में ‘प्लेबैक सिंगिंग’ की तकनीक तब उतनी प्रचलित नहीं थी। इस गाने को फिल्म आलम आरा के ही एक अभिनेता डब्ल्यू. एम. खान (Wazir Mohammed Khan) ने गाया था। फिल्म में उन्होंने एक फकीर का किरदार निभाया था और यह गाना उसी फकीर पर फिल्माया गया था, जिसमें उन्होंने ही इसे आवाज दी और उन्होंने ही इस पर एक्ट भी किया था।

कैमरे के सामने गाया था लाइव गाना

कुछ आर्काइव रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दौर में बड़े वाद्य यंत्र या फिर कोई खास उपकरण नहीं होते थे। ऐसे में डब्ल्यू. एम. खान ने कैमरे के सामने इस गाने को लाइव गाया था और उनके साथ बजने वाले वाद्य यंत्रों को भी उसी वक्त लाइव बजाया गया था।

गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान हारमोनियम और एक तबला बजाया गया था। कहा जाता है कि, संगीतकार फिरोजशाह मिस्त्री हारमोनियम और तबला लेकर कैमरे के पीछे, स्टूडियो के एक कोने में छिपकर बैठ गए थे ताकि वह फ्रेम में न आएं, और उनकी आवाज सीधे माइक्रोफोन में रिकॉर्ड हो सके।

ट्रेन के रुकने का होता था इंतजार

जब ये गाना रिकॉर्ड हुआ तो उस दौरान काफी कुछ नया हुआ था। दरअसल ‘आलम आरा’ फिल्म और इसके गानों की शूटिंग मुंबई के ‘ज्योति स्टूडियो’ में की गई थी। परेशानी की बात तो यह थी कि ये स्टूडियो रेलवे ट्रैक के पास ही मौजूद था, ऐसे में दिनभर यहां पर ट्रेनों की आवाजाही रहती थी।

जब गाने की शूटिंग होती थी तो उस वक्त ट्रेनों का शोर नहीं होता था। उस दौर में सिंगल साउंड सिस्टम से ही रिकॉर्डिंग की जाती थी। ऐसे में हल्का सा भी शोर इसके लिए परेशानी बन जाता, तो जब ट्रेनें रुक जाती थीं तभी गाने की रिकॉर्डिंग की जाती थी। इसलिए गाने और फिल्म की शूटिंग रात के 1 बजे से सुबह 4 बजे के बीच की जाती थी।

इन बीते वर्षों में भारत की पहली बोलती फिल्म का कोई रिकॉर्ड अब नहीं बचा है। आलम आरा (Alam Ara) फिल्म के प्रिंट्स और इसके गानों के ओरिजिनल साउंड ट्रैक अब खो चुके हैं। महज कुछ ही तस्वीरें और रिकॉर्ड्स बाकी हैं, जिन्हें संजोकर रखा गया है।

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