नगर निकाय चुनाव के बाद प्रदेश भाजपा की खींचतान सामने आने लगी है। टिकट आवंटन के दौरान शुरू हुई नाराजगी अब चुनाव परिणाम आने के बाद और तेज हो गई है। कई मंडलों में पार्टी नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगे हैं, जिससे संगठन की चिंता बढ़ गई है।
भाजपा में सबसे ज्यादा विवाद टिकट वितरण को लेकर था। पार्टी के कई नेताओं ने अपने समर्थकों को टिकट न मिलने पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद भाजपा को करीब छह स्थानों पर उम्मीदवार बदलने पड़े। इसके बावजूद कई जगह असंतोष खत्म नहीं हुआ और कार्यकर्ताओं के बीच गुटबाजी बनी रही।
शहरी निकाय चुनाव में भाजपा को उन क्षेत्रों में भी झटका लगा, जहां पार्टी के विधायक हैं। नूरपुर, चौपाल और करसोग सहित कई क्षेत्रों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की हार ने संगठन के भीतर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन तीनों क्षेत्रों में भाजपा के विधायक होने के बावजूद पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।
हमीरपुर जिले के बड़सर में भी विवाद खुलकर सामने आया है। बड़सर में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए विधायक इंद्रदत्त लखनपाल को लेकर पहले से ही पार्टी के भीतर असहमति रही है। पूर्व विधायक बलदेव शर्मा की नाराजगी कई मौकों पर सामने आ चुकी है। ठियोग व कोटखाई में नेता टिकटों पर उलझे थे। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए नेताओं को संगठन में महत्व मिलने से भी पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं में असंतोष बढ़ा है।
ऊना जिले में भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में स्थिति खराब है। प्रदेश भाजपा के कई मंडलों में गुटबाजी का बड़ा कारण अगले विधानसभा चुनाव की टिकट दावेदारी भी मानी जा रही है। कई नेता अभी से अपने क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। कई स्थानों पर पार्टी के भीतर ही विरोधी गुट सक्रिय रहे, जिसका असर चुनाव परिणाम पर पड़ा। भाजपा नेतृत्व अब इस खींचतान को कम करने की कोशिश में जुटेगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता मंडलों और जिलों के पदाधिकारियों से फीडबैक ले रहे हैं।
संगठन स्तर पर बैठकों का दौर आने वाले दिनों में शुरू होगा। इन बैठकों में असंतुष्टों पर कार्रवाई के साथ नाराजगी दूर कर वष 2027 के लिए सभी को साथ लेकर चलने की योजना बनाई जानी प्रस्तावित है। भाजपा के कई नेता भी मानते हैं कि स्थानीय चुनाव में कई जगह व्यक्तिगत समीकरण हावी रहे, पार्टी इन सभी मुद्दों की समीक्षा करेगी। उनका कहना है कि सभी मतभेद बातचीत से सुलझा लिए जाएंगे।


