बंगाल में सरकार बदलने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे के पास बनी 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद को हटाने की नई कोशिशें तेज हो गई हैं, जिसे बांकरा मस्जिद भी कहते हैं।
यह मस्जिद कभी खाली जमीन पर स्थित थी, जो अब एयरपोर्ट के ऑपरेशनल क्षेत्र के काफी अंदर आ चुकी है। मंगलवार को इस मस्जिद का निरीक्षण किया गया। इसके बाद बुधवार को राज्य प्रशासन और मस्जिद के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई, जिसमें सुरक्षा चिंताओं और उड़ान संचालन में आने वाली बाधाओं का हवाला देते हुए मस्जिद को दूसरी जगह स्थानांतरित करने पर जोर दिया गया।
क्या कहते हैं सुरक्षा नियम?
एयरपोर्ट के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि यह मस्जिद सेकेंडरी रनवे से 165 मीटर उत्तर में और चारदीवारी के अंदर लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह पिछले तीन दशकों से अधिक समय से विवाद का मुख्य विषय बनी हुई है।
विमानन नियमों के अनुसार, रनवे से किसी भी इमारत की न्यूनतम दूरी कम से कम 240 मीटर होनी चाहिए, जिसका यहां उल्लंघन हो रहा है।
एक एयरपोर्ट अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि चूंकि मस्जिद उड़ानों के आने के रास्ते के बीच में आती है, इसलिए सेकेंडरी रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर दक्षिण की ओर खिसकाना पड़ा था।
राजनीतिक बदलाव से जगी उम्मीद
मस्जिद को यहां से हटाने के पिछले कई प्रयासों को ज्योति बसु, बुद्धदेब भट्टाचार्य और ममता बनर्जी की सरकारों के दौरान रोक दिया गया था। लेकिन अब केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी की सरकार होने के कारण एयरपोर्ट अधिकारियों को इस बार सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है।
वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी हाल ही में मस्जिद को लेकर चिंताएं जाहिर की थीं और इसे दूसरी जगह स्थानांतरित करने का आह्वान किया था।
इसके बाद बची हुई 2,832 मीटर की रनवे एयरबस A320 और बोइंग 737 जैसे नैरो-बॉडी (छोटे) विमानों के लिए तो पर्याप्त है, लेकिन यह B787 और A330 जैसे वाइड-बॉडी विमानों को संचालित करने के लिए काफी नहीं है। इसके अलावा, आपातकालीन लैंडिंग के दौरान भी यह मस्जिद सुरक्षा के लिए एक बड़ा संभावित खतरा है।


