बाहरी दिल्ली के शालीमार बाग क्षेत्र में दो कारोबारियों के घरों से करीब ढाई करोड़ के आभूषण और नकदी चुराने वाली घरेलू सहायिका पुलिस के लिए पहेली बन गई है।
सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण में सामने आया कि दोनों घरों में चोरी कर फरार होते समय उसने कई बार ई-रिक्शा बदला। जहां ज्यादा भीड़ या बाजार दिखे, वहां ई-रिक्शा से उतरकर वह कुछ दूर पैदल चली। फिर गलियों से होकर फिर ई-रिक्शा लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ गई।
पिछले साल अक्टूबर में कारोबारी के यहां एक करोड़ की चोरी की के बाद भी भागते समय उसने तीन बार ई-रिक्शा बदला था। दोनों ही मामलों में सामने आया है कि उसकी अंतिम लोकेशन भी वहीं तक होती है, जिसके बाद सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होते हैं।
अंतिम लोकेशन से आगे नहीं बढ़ पाई
पुलिस की जांच भी उसकी अंतिम लोकेशन से आगे नहीं बढ़ पाई है। गच्चा देने की यह तरकीब और मोबाइल नंबर न होने के कारण पुलिस को जांच व तलाश करने में दिक्कत आ रही है। दोनों घरों में दो दिन काम करने के बाद तीसरे दिन चोरी करने वाली घरेलू सहायिका ने बहाना बनाकर न तो अपना आधार कार्ड दिया और न ही अपना मोबाइल नंबर।
यही वजह है कि गत 19 अप्रैल को व्यवसायी विजयपाल गुप्ता के घर डेढ़ करोड़ रुपये और पिछले साल अक्टूबर माह में जयभगवान गर्ग के यहां हुई एक करोड़ के आभूषण व नकदी की चोरी की वारदात की गुत्थी पुलिस आज तक नहीं सुलझा पाई।
भीड़ भरे इलाकों में कुछ दूरी पैदल चली
पुलिस सूत्र व पीड़ित परिवारों से मिली जानकारी के अनुसार, पहली घटना में चोरी के बाद आरोपी महिला शालीमार बाग से लेकर रोहिणी सेक्टर-16 तक सीसीटीवी कैमरों में नजर आ रही है। इस दौरान उसने तीन ई-रिक्शा बदला। भीड़ भरे इलाकों में कुछ दूरी पैदल चली। सेक्टर-16 के बाद सीसीटीवी कैमरे न होने कारण उसका कोई सुराग नहीं मिल सका।
सूत्र बताते हैं कि गत 19 अप्रैल को कारोबारी विजयपाल गुप्ता के घर से डेढ़ करोड़ के आभूषण चोरी होने के बाद सीसीटीवी में आरोपित महिला ई-रिक्शा में सवार होकर गई। उसकी अंतिम लोकेशन प्रशांत विहार (रोहिणी सेक्टर-14) के सैंटम अस्पताल के पास दिखी। इसके बाद पैदल चलते-चलते वह भीड़ में गायब हो जाती है।
प्रशांत विहार के बाद पुलिस उसकी लोकेशन खोज नहीं पाई। सीसीटीवी कैमरे में तस्वीर कैद होने के बावजूद वह पुलिस को लगातार छका रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़ित परिवार के पास न तो घरेलू सहायिका का मोबाइल नंबर है और न आधार कार्ड। उन्होंने उसका पुलिस वैरिफिकेशन नहीं कराया था।
घरों में चोरी करने में बड़े गिरोह के शामिल होने का अंदेशा
किस घर में घरेलू सहायिका की आवश्यकता है, यह सूचना आरोपित महिला को आखिर किसने दी, पुलिस इसकी जांच कर रही है। पुलिस के साथ-साथ पीड़ित परिवार को भी अंदेशा है कि इन वारदातों के पीछे अपराधियों का पूरा नेटवर्क काम कर रहा है।
पीड़ित कारोबारी विजयपाल गुप्ता बताते हैं कि उनके यहां से डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण चुराने वाली महिला घरेलू काम से ज्यादा आलमारी/ताले खोलने में ज्यादा पारंगत नजर आई। ऐसा लगता है कि वह किसी शातिर गिरोह की सदस्य है।
कारोबारी के अनुसार, उनके घर सहायिका की जरूरत है, यह जानकारी आरोपी महिला तक कैसे और किसने पहुंचाई, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।


