शहर में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। इंसान तो इंसान, जानवर व चिड़ियाघर में बंद वन्यजीवों का भी बुरा हाल है।
टाटा स्टील जूलाेजिकल पार्क सोसाइटी द्वारा वन्यजीवों को गर्मी से बचाव के लिए कई तरह की पहल की जा रही है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है वन्यजीवों के शरीर को ठंडा रखना ताकि उन्हें गर्मी की तपिस महसूस न हो।
मांस खाने वाले वन्यजीव जैसे शेर, बाघ, भालू, तेंदुआ, लकड़बग्घे जिनका मुख्य आहार मांस है इसलिए मांसाहारी वन्यजीवों को ज्यादा गर्मी लगती है इसलिए इनके पिंजरों में तीन से चार बड़े वाले (डेजट) कूलर लगाए गए हैं।
जूलॉजिकल पार्क में बाडे में शेर के लिए लगाया गया कूलर। जागरण
साथ ही प्रत्येक तीन से चार दिनों में इन्हें ओरल डी-हाइड्रेशन साल्यूशन (ओआरएस) का खोल दिया जा रहा है ताकि इनके शरीर में पानी की कमी न हो।
इसके अलावा पिंजरों में सीधी धूप न पड़े, इसके लिए उसे बांस की चटाई से ढ़का गया है। साथ ही उनके पिंजरों को खोलकर रखा गया है ताकि उमस से बचाव के लिए वन्यजीव चाहे तो अपने बाड़े के खुली जगह पर पेड़ के नीचे सुस्ता सकते हैं या बाड़े के किनारे बने तालाब में जाकर नहा सकते हैं।
जमीन ठंडा रखने को पानी का छिड़काव
शाकाहारी वन्यजीवों को भी गर्मी से बचाव के लिए उनके अधिकतर क्षेत्रों को पुआल व बांस की चटाई से ढ़का गया है ताकि सीधे तेज धूप उन पर न पड़े।
जूलॉजिकल पार्क में पेड़ के छाव में आराम करते हिरन। जागरण
इसके अलावा पिंजरों में जगह-जगह स्प्रिंकल लगाए गए हैं जहां से बीच-बीच में ठंडे पानी का छिड़काव किया जाता है ताकि जमीन ठंडा रहे।
इसके अलावा इनके शरीर को ठंडा रखने के लिए इन्हें भोजन में खीरा व तरबूज भी खिलाया जा रहा है। साथ ही पानी में खोलकर इन्हें ओआरएस दिया जा रहा है।
पक्षियों को भी दिया जा रहा है तरबूज व खीरा
टाटा स्टील जूलोजिकल पार्क में कई तरह की चीनी मुर्गियां, बतख, विदेशी नस्ल के तोते, पक्षी हैं। इनके पिंजरों में हमेशा पानी भरा रहे, इसकी व्यवस्था की गई है। साथ ही प्रत्येक पक्षी को एक दिन में 150 से 200 ग्राम तक खीरा व तरबूज परोसे जा रहे हैं।


