दिल्ली हाई कोर्ट ने सॉन्ग ‘बचपन का प्यार’ और उसकी चर्चित हुक लाइन ‘जाने मेरी जानेमन बचपन का प्यार भूल नहीं जाना रे’ के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने कई यूट्यूब चैनलों और अज्ञात लोगों को बिना अनुमति इसका उपयोग करने से रोक दिया है। अदालत ने कहा कि प्रथमदृष्टया गाने के काॅपीराइट आईवी इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के पास हैं। न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने 15 मई को यह अंतरिम आदेश काॅपीराइट उल्लंघन से जुड़े एक मुकदमे में पारित किया।
अदालत ने राहुल सिंह समेत अन्य नामित प्रतिवादियों और अज्ञात पक्षों को गीत, उसकी हुक लाइन या उससे जुड़े किसी हिस्से के उपयोग, वितरण और व्यावसायिक इस्तेमाल से तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया।
मूल रूप से एक गुजराती गीत है ये
याचिका के अनुसार बचपन का प्यार मूल रूप से वर्ष 2017 में बना एक गुजराती गीत है। इसके बोल पीपी बरैया ने लिखे थे, संगीत मयूर नाडिया ने तैयार किया था और इसे कमलेश बारोट ने गाया था। बाद में गीत के अधिकार मेशवा इलेक्ट्राॅनिक्स को सौंपे गए और 12 मई 2017 को इसे यूट्यूब पर रिलीज किया गया।
कंपनी ने अदालत को बताया कि जुलाई 2021 में मेशवा इलेक्ट्राॅनिक्स ने यूनिवर्सल म्यूजिक मीडिया इंडिया को गीत के अनुकूलन और सिंक्रोनाइजेशन का लाइसेंस दिया था।
सहदेव दिर्दो और बादशाह ने बताया है नया गाना
इसके बाद सहदेव दिर्दो और रैपर बादशाह द्वारा इसका नया संस्करण तैयार किया गया, जिसे अगस्त 2021 में यूट्यूब पर जारी किया गया। उस संस्करण में मूल गीत के रचनाकारों को भी श्रेय दिया गया था।
आईवी एंटरटेनमेंट का कहना है कि उसने सात नवंबर 2025 को हुए बौद्धिक संपदा अधिकार अधिग्रहण समझौते के तहत बचपन का प्यार समेत 1250 गीतों और संबंधित यूट्यूब चैनल के अधिकार प्राप्त किए थे।
कंपनी ने दावा किया कि अप्रैल 2026 में उसे पता चला कि कई यूट्यूब चैनलों पर गीत की हुक लाइन, धुन और अन्य हिस्सों का बिना अनुमति इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें कुछ वीडियो पर लाखों से लेकर करोड़ों तक व्यूज आए हैं।
21 अक्टूबर को दोबारा होगी सुनवाई
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादी गीत का अनधिकृत इस्तेमाल कर गैरकानूनी आर्थिक लाभ कमा रहे हैं, जिससे वादी कंपनी को वित्तीय नुकसान हो रहा है। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे अपने यूट्यूब चैनलों पर गीत के इस्तेमाल से हुई आय का पूरा विवरण अदालत में पेश करें।
मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष होगी, जबकि 21 अक्टूबर को यह मामला दोबारा हाई कोर्ट में सूचीबद्ध किया जाएगा।


