देश में श्रमिकों की स्थिति वेतन के मामले में कैसी है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। हैंडक्राफ्ट्स और हैंडलूम सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है। एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह सेक्टर कम प्रोडक्टिविटी और काम से जुड़े खतरों जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
इस सेक्टर में काम करने वाले क्राफ्ट वर्कर की स्थिति भी काफी बुरी है। 1 करोड़ से ज्यादा वर्कर हर रोज के महज 270 रुपये ही कमा पा रहे हैं। यह दावा सोमवार को जारी इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (IHD) और क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से की गई एक ताजा स्टडी में किया गया है।
इसके मुताबिक, हस्तशिल्प और हथकरघा सेक्टर की पहुंच ई-कॉमर्स व एक्सपोर्ट समेत पूरे मार्केट पर बहुत सीमित हो गई है। मजदूरों की कमाई सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से भी कम है।
यह सर्वे असम, राजस्थान, तमिलनाडु, UP और बंगाल में किया गया है। स्टडी के लिए छठी आर्थिक जनगणना में दर्ज HH इकाइयों को आधार बनाया गया। स्टडी में दावा किया गया है कि ज्यादाकर यूनिट घर के अंदर से ही संचालित होते हैं।
इतना ही नहीं, देश में केवल 2.6 फीसदी यूनिट ही ऐसे हैं, जहां 5 से ज्यादा मजदूर काम करते हैं। कई यूनिट का संचालन कोई एक ही व्यक्ति करता है और इसमें पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
राजस्थान में ऐसे यूनिट संचालित करने वाली महिला मालिकों की संख्या 94 फीसदी है। कुछ मामूली ही इकाइयां ऐसी हैं, जो अपने खातों का हिसाब-किताब रखती हैं। ज्यादातर किसी औपचारिक योजना या कार्यक्रम के तहत पंजीकृत नहीं हैं।


