दून मेडिकल कॉलेज मेस घोटाले पर सख्त कार्रवाई, छात्रों ने भी FIR का लिया फैसला

 राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों की मेस फीस में फर्जीवाड़े मामले में कॉलेज प्रशासन और पीड़ित छात्रों की बैठक हुई। इसमें कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को आश्वस्त किया कि घोटाले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने मुख्य आरोपियों के विरुद्ध जल्द से जल्द पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

प्राथमिक जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि छात्रों से मेस फीस कॉलेज के अधिकृत खाते के बजाय मेस मैनेजर के निजी खाते में जमा कराई जा रही थी। यह अवैध खेल पिछले सवा साल से लगातार चल रहा था।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मूल मेस संचालक ने पिछले छह महीनों से कॉलेज प्रशासन द्वारा कोई भुगतान न मिलने की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद जब खातों का मिलान किया गया, तो वहां छात्रों द्वारा जमा की गई लाखों रुपये की राशि गायब मिली।

इस वित्तीय अनियमितता के सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज के हास्टल मैनेजमेंट, वित्तीय विभाग और प्रशासनिक प्रबंधन के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। सोमवार को कॉलेज परिसर में छात्रों के संभावित उग्र प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया था।

हालांकि, छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे केवल शांतिपूर्ण ढंग से बैठक कर अपनी चिंताओं को अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करना चाहते थे, जिसके लिए बाद में कॉलेज की प्राचार्य ने तुरंत अपनी स्वीकृति दे दी थी।

बैठक के दौरान प्राचार्य डा. गीता जैन ने सभी प्रभावित छात्रों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना और उनके त्वरित समाधान का मजबूत भरोसा दिलाया। कई छात्र इस बात को लेकर गहरे असमंजस में थे कि क्या मेस की यह डूबी हुई राशि दोबारा उनसे वसूली जाएगी।

इस पर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि छात्रों को केवल अपनी वास्तविक बकाया राशि ही जमा करनी होगी। इस पारदर्शी रवैये के बाद छात्रों ने भी आरोपियों के खिलाफ अपनी ओर से अलग से एफआइआर दर्ज कराने का सामूहिक निर्णय लिया है।

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