केवल इस आधार पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता कि शादी का वादा पूरा नहीं हुआ, सुप्रीम कोर्ट ने रद की FIR
सुप्रीम कोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म के आरोप में दर्ज प्राथमिकी (एफआइआर) को यह कहते हुए रद कर दिया कि यह सहमति से बने संबंधों में कड़वाहट आने का एक विशिष्ट मामला है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने स्पष्ट किया कि हर रिश्ता जो शादी तक नहीं पहुंचता, उसे ”झूठा वादा” या दुष्कर्म नहीं माना जा सकता, विशेषकर जब संबंध आपसी सहमति से रहे हों।
पीठ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पिछले वर्ष मार्च के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें आरोपित के खिलाफ बिलासपुर में फरवरी 2025 में दर्ज एफआइआर से संबंधित कार्यवाही को रद करने से इन्कार कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता कि शादी का वादा पूरा नहीं हुआ। कोर्ट ने टिप्पणी की, ”तथ्य स्पष्ट रूप से इशारा करते हैं कि यह आपसी सहमति से बने संबंधों के कड़वाहट में बदलने का मामला है। ऐसे मामलों में पक्षों को संयम बरतना चाहिए था और अपने व्यक्तिगत रिश्तों के विवाद में राज्य (कानूनी मशीनरी) को शामिल करने से बचना चाहिए था।”


