भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी ऑपरेशनल बढ़त को मजबूत करने के लिए एक नई पहल के तहत तीन स्वदेशी जहाजों को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है। इसमें से एक स्टेल्थ फ्रिगेट, एक पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत और एक सर्वे जहाज है। इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इस क्षेत्र में चीन ने अपनी समुद्री मौजूदगी लगातार बढ़ाई है।
वहीं, इन जहाजों के आने से उनकी गतिविधियों पर नजर रखने में आसानी होगी। ये जहाज दूनागिरी, अग्रय और संशोधक कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा बनाए गए थे और हाल ही में नौसेना को सौंपे गए हैं।
प्रोजेक्ट 17A के तहत किया जा रहा निर्माण
अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 45,000 करोड़ रुपये के ‘प्रोजेक्ट 17A’ कार्यक्रम के तहत पांचवें स्टेल्थ फ्रिगेट, दूनागिरी को एक महीने के भीतर बेड़े में शामिल किए जाने की उम्मीद है। इसके साथ ही, पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत (ASW-SWC) ‘अग्रय’ और बड़े सर्वे जहाज ‘संशोधक’ को भी एक साथ बेड़े में शामिल किया जाएगा।
प्रोजेक्ट 17A के तहत बाकी बचे दो फ्रिगेट के भी छह महीने के भीतर बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है। जहां नीलगिरि, उदयगिरि, हिमगिरि और तारागिरि पहले से ही सेवा में हैं, वहीं महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि के भी इस साल के आखिर में दूनागिरी के बाद बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है।
75% स्वदेशी सामग्री के साथ-साथ किया जा रहा तैयार
P-17A (या नीलगिरि-क्लास) प्लेटफॉर्म भारत के स्वदेशी युद्धपोत-निर्माण कार्यक्रम में एक बड़ा कदम हैं। इनमें लगभग 75% स्वदेशी सामग्री के साथ-साथ आधुनिक हथियार, सेंसर और निगरानी प्रणालियां लगी हैं। P-17A, शिवालिक-क्लास स्टील्थ फ्रिगेट (P-17) का अगला वर्जन है। इसके साथ ही नीलगिरि, उदयगिरि और तारागिरि को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में बनाया गया था।
ये फ्रिगेट ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, बराक-8 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, MF-STAR निगरानी रडार और पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमताओं से लैस हैं। अग्रय, GRSE द्वारा बनाए जा रहे आठ ASW-SWC में से चौथा है, और इसे तटीय जल और समुद्री किनारों वाले क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है।
77-मीटर लंबा यह जहा पानी के नीचे निगरानी, खोज और हमला करने वाले मिशनों, और विमानों के साथ मिलकर ऑपरेशन करने में सक्षम है। संशोधक, जो GRSE द्वारा बनाए जा रहे चार बड़े सर्वेक्षण जहाजों में से आखिरी है, उसे भारत की हाइड्रोग्राफिक और सर्वेक्षण क्षमताओं के मजबूत होने की उम्मीद है।
110-मीटर लंबा यह जहाज तटीय और गहरे पानी में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षणों के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें बंदरगाहों के प्रवेश मार्ग और नेविगेशन चैनल शामिल हैं।


