तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद अब सियासी जुबानी जंग और तेज हो गई है। डीएमके के वरिष्ठ नेता और तिरुचेंदूर से विधायक अनीता राधाकृष्णन ने रविवार को राज्य के नए मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राधाकृष्णन ने दावा किया कि यह नई सरकार छह महीने भी नहीं टिक पाएगी और अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में शिकस्त झेलने वाले डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन जल्द ही मुख्यमंत्री के रूप में वापसी करेंगे।
दक्षिणी तमिलनाडु में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान राधाकृष्णन ने सत्ताधारी दल टीवीके के वरिष्ठ नेता और विलीवक्कम सीट से चुनाव जीतने वाले आधव अर्जुना को खुली चुनौती भी दे डाली।
राधाकृष्णन की खुली चुनौती
टीवीके नेता आधव अर्जुना पर निशाना साधते हुए अनीता राधाकृष्णन ने कहा कि यह सरकार सिर्फ चार महीने और बचेगी। आधव अर्जुना नाम का एक व्यक्ति है। अगर तुममें हिम्मत है, तो अपने विधायक पद से इस्तीफा दो, मैं भी अपनी सीट छोड़ता हूं। आओ, तिरुचेंदूर में आमने-सामने का मुकाबला करते हैं। यह हमारा इलाका है, हम यहां किसी को भी धूल चटा देंगे।
तिरुचेंदूर सीट पिछले 25 वर्षों से राधाकृष्णन का गढ़ रही है। उन्होंने पहली बार 2001 में डीएमके की चिरप्रतिद्वंदी पार्टी एआईएडीएमके के टिकट पर यहां से जीत दर्ज की थी, जिसके बाद 2009 से वे लगातार डीएमके के टिकट पर इस सीट को जीतते आ रहे हैं।
मतदाताओं पर साधा निशाना
राधाकृष्णन ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का भी बचाव किया, जो इस चुनाव में अपनी पारंपरिक और सुरक्षित सीट कोलाथुर हार गए थे। स्टालिन को डीएमके के ही एक असंतुष्ट पूर्व नेता वी.एस. बाबू ने हराया था, जिन्होंने ऐन वक्त पर विजय की पार्टी टीवीके का दामन थामकर अपने पूर्व बॉस को करारी शिकस्त दी थी।
राधाकृष्णन ने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे नेता स्टालिन अगली बार त्रिची से चुनाव लड़ें। स्टालिन ने कोलाथुर को सिंगापुर जैसा बना दिया था। इसके साथ ही उन्होंने कोलाथुर के मतदाताओं पर तंज कसते हुए उन्हें नकारा तक कह दिया। उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि हमारे थलाइवर ही अगले मुख्यमंत्री हैं। अगले चार या छह महीनों के भीतर हमारे नेता फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर होंगे।
तमिलनाडु मेंसबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर
यह बयानबाजी तमिलनाडु में टीवीके और डीएमके के बीच बढ़ती कड़वाहट को साफ दर्शाती है। अभिनेता से नेता बने विजय की चुनावी जीत को तमिलनाडु के इतिहास में दशकों का सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है।
विजय की टीवीके ने राज्य की 234 सीटों में से अकेले 108 सीटों पर बंपर जीत दर्ज की थी, जो पूर्ण बहुमत के आंकड़े से सिर्फ 10 सीट कम थी। इस जीत के साथ ही विजय ने राज्य में पिछले 62 वर्षों से बारी-बारी से राज कर रही डीएमके और एआईएडीएमके के द्विध्रुवीय राजनीतिक वर्चस्व को पूरी तरह से खत्म कर दिया।
बहुमत के लिए जरूरी 10 सीटों की कमी को एक हफ्ते के भारी सियासी ड्रामे के बाद कांग्रेस, दो वामपंथी दलों और वीसीके के समर्थन से पूरा किया गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी दल पहले डीएमके के मजबूत सहयोगी माने जाते थे।
बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अपने फिल्मी सफर से राजनीतिक शिखर तक के सफर को पूरा किया। इसके बाद उन्होंने विधानसभा में 144 बनाम 22 मतों से विश्वास मत भी हासिल कर लिया।


