राजगीर पुरुषोत्तम मास मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों भक्तों ने लगाई डुबकी; 27 मई को पहला शाही स्नान

राजकीय पुरुषोत्तम मास मेला 2026 के उद्घाटन के दौरान सीएम सम्राट चौधरी धार्मिक भाव से ओत प्रोत दिखे।

चूंकि सीएम बनने के बाद पहली बार उनका यहां आगमन हुआ। उन्होंने काफी सम्मान और आध्यात्मिक भाव से लिया। यह भाव साफ परिलक्षित हो रहा था जो अनुष्ठान के क्रम में सप्तधारा गर्म जल झरने तथा ब्रह्म कुण्ड के पवित्र जल से आचमन और ध्वजारोहण के दौरान आस्था के साथ ध्यान मग्न नजर आए।

इस पूरे धार्मिक गतिविधियों के दौरान परम पावन ध्वज को नमन तथा 33 कोटि देवी देवताओं के आह्वान के मंत्रोच्चार व स्मरण के दौरान सीएम सम्राट चौधरी के चेहरे पर अलौकिक भाव देखा गया।

उनके चेहरे के हाव भाव से राज्य के कुशल मंगल सह समस्त जीव जगत कल्याण की कामना झलक रही थी।

वापसी में कुंड परिसर की सीढियां उतरते वक्त सीएम ने कुंड में डुबकी लगाने पहुंच रहे तीर्थयात्रियों की समुचित जनसुविधाओं पर सरसरी निगाह भी डाली।

लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

वहीं, पुरुषोत्तम मास मेले के पहले दिन रविवार को लगभग तीन लाख से भी अधिक श्रद्धालुओं ने विभिन्न कुंडों में आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान महिला तीर्थयात्रियों की संख्या सबसे अधिक थी।

जिसमें बिहार के उत्तरी हिस्से के विभिन्न जिलों में बेगुसराय, कटिहार, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, मुजफ्फरपुर के अलावे पटना, बख्तियार पुर, मोकामा, बिहार शरीफ, सहित नालन्दा जिले के अनेक हिस्सों से श्रद्धालुओं की भीड़ शामिल थी।

जिसमें ग्रामीण की भी संख्या दिखी। इन तीर्थ यात्रियों का जत्था सर पर लादे गठरी, थैले इत्यादि में खाने का सामग्रियों से लैस पहुंचे थे। 27 मई को पहला शाही स्नान है।

इस दौरान लगभग जिग जैग में खड़े लोगों को आपदा मित्रों द्वारा बोतल से जल पिला गला तर कर उमस वाली गर्मी में तृप्त रखा जा रहा था।

उधर सुरक्षा को लेकर ब्रह्म कुण्ड प्रवेश द्वार से लेकर भीतर के सभी कुंडो तक, सुरक्षाकर्मियों द्वारा बैरिकेडिंग के अंदर होकर जाते तीर्थयात्रियों पर खास ध्यान रखा जा रहा था। जहां कूलर, वाटर स्प्रिंकलर फैन से लैस पंडाल को हवादार बनाया गया था।

प्रवेश द्वार पर पंडाल के गलियारे में बनारस और काशी की भांति डमरू धारक पारंपरिक कलाकारों द्वारा शास्त्रीय वाद्ययंत्रों में शुमार बड़े बड़े डमरू से माहौल को धार्मिक रुप दिया जा रहा था। जो पारंपरिक परिधानों में सजे संवरे डमरू बजाकर तीर्थयात्रियों का स्वागत करते आकर्षण का केंद्र दिखे।

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