बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के माइक्रोबायोलाजी विभाग के डॉ. रवि कुमार गुप्ता और शोधार्थी देशराज दीपक कपूर ने गाय के गोबर का उपयोग कर कम लागत वाला जैविक रूप से नष्ट होने वाला बायोप्लास्टिक विकसित किया है।
शोध के दौरान कचरा डंपिंग साइट से एक नए बैक्टीरिया की खोज की गई, जिसकी सहायता से ‘पालीहाइड्राक्सीब्यूटायरेट’ (पीएचबी) नामक बायोप्लास्टिक तैयार किया गया। यह बायोप्लास्टिक न केवल मजबूत और उपयोगी है, बल्कि मिट्टी में दबाने पर मात्र 50 दिनों के भीतर पूरी तरह जैविक रूप से नष्ट हो जाती है।
यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी रेपोर्ट में प्रकाशित हुआ है, जिससे विश्वविद्यालय की विज्ञानी उपलब्धियों को वैश्विक पहचान मिली है। शोधकर्ताओं के अनुसार, पारंपरिक बायोप्लास्टिक निर्माण प्रक्रिया अत्यधिक महंगी होती है, जबकि इस नई तकनीक में कृषि और पशु अपशिष्ट, विशेष रूप से गाय के गोबर को आधार सामग्री के रूप में उपयोग किया गया है।
इससे उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है और यह तकनीक अत्यंत किफायती व स्वदेशी साबित हो सकती है। इसकी तीव्र जैव-विघटन क्षमता है। यह शोध ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और ‘सर्कुलर बायोइकोनामी’ की अवधारणा को भी मजबूत करता है।


