हिसार के सरकारी स्कूल में छात्राओं को ‘मुर्गा’ बनाकर घुमाने पर मानवाधिकार आयोग सख्त, प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

हरियाणा के हिसार जिले के एक सरकारी विद्यालय में छात्राओं को कथित रूप से ‘मुर्गा’ बनाकर परिसर में घुमाने की घटना ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले को लेकर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वत संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है और संबंधित प्रशासनिक व शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

आयोग के संज्ञान में यह मामला प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के माध्यम से आया, जिसमें सरकारी उच्च विद्यालय, गांव जगान (ब्लॉक अग्रोहा, जिला हिसार) में छात्राओं को अपमानजनक दंड दिए जाने का आरोप लगाया गया था। इस घटना से जुड़े तीन वीडियो भी सामने आए, जिन्हें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजा गया। प्राथमिक जांच में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने जांच समिति का गठन कर दिया है।

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा और सदस्यों कुलदीप जैन व दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह छात्राओं की गरिमा, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। आयोग ने स्पष्ट किया कि अनुशासन के नाम पर किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि यह बच्चों के मूल मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है।

आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाएं “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों की मूल भावना के विपरीत हैं और शिक्षा संस्थानों की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण देना विद्यालयों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

कानूनी पहलुओं पर जोर देते हुए आयोग ने बालकों का निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 17 का हवाला दिया, जो शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाती है। साथ ही किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धाराओं के तहत बच्चों के प्रति क्रूरता को दंडनीय अपराध बताया गया है।

आयोग ने हिसार के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को अलग-अलग बिंदुओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इनमें प्रशासनिक निगरानी, जांच की स्थिति, संभावित एफआईआर, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका, छात्र सुरक्षा के उपाय और भविष्य की निवारक रणनीति शामिल हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। इस मामले की अगली सुनवाई 12 मई 2026 को निर्धारित की गई है।

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