जहां एक ओर सरकार पेट्रोल डीजल बचाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर बसों की बदहाल सुविधाएं लोगों को निजी कारों में किराया देकर अपनी मंजिल तक पहुंचना ज्यादा आसान लग रहा है।
उतरेटिया के बस स्टाप पर रुकी कई सरकारी बसों के परिचालक यात्रियों को बैठाने के लिए पुकारते रहे लेकिन अधिकांश यात्री निजी कार का इंतजार करते रहे तो कोई निजी कार में बैठता हुआ दिखाई दिया जिसके चलते सरकारी बसों की अधिकांश सीटें खाली दिखीं, जबकि सड़क किनारे निजी कार चालक सवारियां भरकर तेजी से निकलते दिखाई पड़े।
राहगीरों और यात्रियों का कहना है कि भीषण गर्मी में बिना एसी और भीड़भाड़ वाली बसों में सफर करना मुश्किल हो गया है। कई यात्रियों ने बताया कि बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ता है, जबकि किराया भी अपेक्षाकृत कम नहीं है।
उतरेटिया से बछरावां जाने के लिए रोडवेज बस करीब 80 रुपये और रायबरेली के लिए लगभग 120 रुपये प्रति यात्री किराया ले रही है। वहीं निजी कार चालक बछरावां के 50 रुपये और रायबरेली के 100 रुपये लेकर यात्रियों को आराम से पहुंचा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना चाहती है तो बसों में सुविधाएं बढ़ानी होंगी। समय पर बस सेवा, साफ सफाई, बेहतर सीटिंग और गर्मी से राहत की व्यवस्था जरूरी है। यात्रियों का कहना है कि मजबूरी में लोग निजी वाहनों का सहारा ले रहे हैं, जिससे एक तरफ ट्रैफिक और प्रदूषण बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ सरकारी बसें खाली दौड़ रही हैं।


