वक्त बदला, बदले जज्बात और वाइस चेयरमैन की छीन गई कुर्सी; ‘भाजपा ने भाजपा के खिलाफ किया काम’, पर ये कैसे हुआ?

बहादुरगढ़ नगर परिषद में वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा (पालेराम) के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शुक्रवार को बैठक में पारित हो गया। इसके साथ ही राजपाल शर्मा से उनकी कुर्सी छिन गई है।

वे भाजपा समर्थित हैं, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव में कई भाजपाई पार्षद भी शामिल रहे। अब नगर परिषद के बोर्ड का एक साल ही बाकी है। ऐसे में दोबारा से इस पद पर चुनाव होगा या नहीं, इस पर स्थिति साफ नहीं है।

अगर चुनाव होता है तो कई दावेदार आ सकते हैं। इधर, प्रस्ताव पारित होने के बाद बैठक में मौजूद पार्षद खुश नजर आए। हॉल से बाहर आते ही पार्षद ढोल की थाप पर नाचने लगे। बाद में आतिशबाजी भी की।

पार्षदों का कहना है इस अविश्वास प्रस्ताव के पास होने से कई बिंदुओं पर राहत मिली है। विकास का रास्ता भी खुलेगा। एडीसी जगनिवास की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे बैठक का समय निर्धारित किया गया था।

चेयरमैन और 31 पार्षदों समेत कुल 32 में से 26 सदस्य पहुंचे। फिर नियमानुसार वोटिंग हुई तो उपस्थित सभी 26 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और राजपाल शर्मा को इस पद से हटा दिया। अब वे पार्षद ही रह गए हैं।

अविश्वास प्रस्ताव को पारित करने वाले सभी पार्षद बधाई के पात्र हैं। राजपाल शर्मा का व्यवहार बैठक में अच्छा नहीं रहता था। इसलिए वे इस पद पर बने रहने योग्य नहीं थे। पार्षदों ने मिलकर यह निर्णय लिया।
-सुनैना मलिक, वार्ड-23

ये नहीं पहुंचे

नगर परिषद में चेयरमैन के अलावा 31 पार्षद हैं। अविश्वास प्रस्ताव था, इसलिए वाइस चेयरमैन रहे राजपाल शर्मा का तो न आना स्वाभाविक था। साथ में चेयरमैन के अलावा पार्षद राजेश तंवर, प्रवीण छिल्लर, प्रवीण सोनू और सविता सैनी ने इस बैठक से दूरी बनाई।

पद से हटने पर राजपाल शर्मा बोले, भाजपा ने भाजपा के खिलाफ काम किया

वाइस चेयरमैन पद से हटने के बाद वार्ड 4 से पार्षद राजपाल शर्मा ने कहा कि इनेलो व कांग्रेस तो विरोधी पार्टी हैं, मगर भाजपा समर्थित पार्षदों ने भी मेरे खिलाफ अविश्वास जताया, वह गंभीर विषय है। शहर में राम-लक्ष्मण का दिखावा कर चुके पार्टी के दो लोगों ने भी खूब साजिश रची। एक ऐसा नेता जिसकी कुछ समय पहले तक कोई हैसियत नहीं थी, उसने भी पार्टी के खिलाफ काम किया। समय पर सबकाे आइना दिखाया जाएगा।

ढाेल वाले फोन करते रहे…साहब पैसा कौन देगा

अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ तो नप परिसर में ढोल बज उठे। ढोल की थाप पर कई पार्षद झूमते दिखे, मगर बाद में सब निकल गए और ढोल वाले मुंह ताकते रह गए। उन्हें पैसे कौन देगा, यह पता नहीं चला। दो ढोल वाले गेट पर बैठे रहे और फोन घुमाते रहे। कई देर बाद उन्हें फोन पर आश्वासन मिला कि शाम को उनके पैसे मिल जांएगे। इसके बाद उन्हाेंने राहत की सांस ली।

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