बिहार के स्कूलों में सुरक्षा की नई पाठशाला; 80 हजार स्‍कूलों के बच्चों को दी जाएगी लाइफ-सेविंग ट्रेनिंग

 राज्य के सभी 80 हजार सरकारी विद्यालयों में मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम सख्ती से लागू किया जाएगा।

प्रत्येक विद्यालय में आपदा प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा। सभी छात्र-छात्राओं को आग और लू से बचाव का पाठ पढ़ाया जाएगा। यह अप्रैल से ही विद्यालयों में लागू होगा।

प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के बीच बाल प्रेरकों को चयन किया जाएगा। हर शनिवार को अगलगी से बचाव के लिए विद्यालयों में बच्चों की माॅक ड्रिल होगा।

बच्चों को आग और लू से बचाव का पाठ पढ़ाने के लिए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद तथा राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के सहयोग से पाठ्य सामग्री तैयार की गई है।

प्रत्येक विद्यालय में बाल प्रेरकों का होगा चयन

इसके तहत विद्यालयों में बच्चों को यह बताया जाएगा कि अगलगी का क्या अर्थ है, आग लगने के कौन से प्रमुख कारण होते हैं, अगलगी से बचाव के लिए क्या करें, अगलगी से बचाव के लिए क्या नहीं करें।

अगलगी से बचाव के लिए बच्चे माॅक ड्रिल भी करेंगे। माक ड्रिल में पहले बच्चे रुकेंगे, फिर लेटेंगे और उसके बाद लुढ़केंगे।

बच्चों को यह बताया जाएगा कि दीपक, दीया, लालटेन, मोमबत्ती को ऐसी जगह नहीं रखें, जहां से गिर कर आग लगने की संभावना हो।

फसल कटनी के बाद खेत में छोड़े गये डंठल या भूसा में आग नहीं लगाएं। कनात अथवा टेंट के नीचे से बिजली का तार न ले जाएं।

हर स्कूल में गठित होगी आपदा प्रबंधन समिति

भोजन बनाने का कार्य तेज हवा के समय नहीं करें। जलती हुई माचिस की तौली अथवा अधजली बीड़ी-सिगरेट इधर-उधर न फेंके। ढीले-ढाले और पोलिस्टर कपड़े पहन कर खाना नहीं बनाएं।

ट्रेनों और बसों में ज्वलनशील पदार्थ लेकर नहीं चलें। आपदा बचाव में ट्रेंड बच्चों में बाल प्रेरकों का चयन होगा। चयनित बाल प्रेरकों को उनकी भूमिका बतायी जाएगी।

उन्हें भूकंप, बाढ़, अगलगी, उनका, सड़क दुर्घटना, भगदड़, सर्पदंश, पेयजल, स्वच्छता और जलवायु परिवर्तन एवं
स्वास्थ्य एवं पोषण विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा।

विद्यालयों में आपदा प्रबंधन समिति में चयनित बच्चों के अलावा शिक्षक, अभिभावक एवं विद्यालय शिक्षा समिति के तीन सदस्य मनोनीत होंगे। इसका आकार अधिकतम 12-13 सदस्यों का होगा।

लू से बचाव के तरीके से बच्चे होंगे प्रशिक्षित

बच्चों को बताया जाएगा कि लू से बचने के लिए पानी बार-बार पियें। स्कूल में अपने साथ पानी का बोतल रखें। प्रत्येक स्कूल में पौने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।

हल्का खाना खाएं, लेकिन बार-बार खाएं। ताजी पका हुआ भोजन करें। तरबूज, खीरा, ककड़ी, संतरा सहित अधिक पानी की मात्रा वाले फलों का सेवन करें। घर में बने लस्सी, छाछ, नींबू पानी, आम का पन्ना नियमित रूप से पियें। स्कूलों में ओआरएस रखे जाएं।

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