भारत में ‘के-वेव’ का तूफान; सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, अब लाइफस्टाइल और जुबान पर भी चढ़ा कोरियाई रंग

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भारत में दक्षिण कोरियाई संस्कृति, जिसे के-वेव या हल्लयू कहा जाता है, अब सिर्फ टीवी या मोबाइल स्क्रीन तक  सिमट कर नहीं रही। यह भारतीय युवाओं की पसंद, सोच और लाइफस्टाइल को भी तेजी से प्रभावित कर रही है। भारत में अब आपको हर दूसरा टीनएजर कोरियन शोज या के-पॉप का फैन मिल जाएगा।

इसकी लोकप्रियता यूं समझ लीजिए भारत में के-वेव एक मजबूत सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी और अरबों के बिजनेस के रूप में उभरी है, जिसने यहां एक पूरा इकोसिस्टम खड़ा कर दिया है। ऐसे में यह सवाल पूछना गलत नहीं होगा कि आखिर भारतीय युवाओं को कोरियाई संस्कृति इतनी क्यों पसंद आ रही है।

ओटीटी से शुरू हुई कोरियाई लहर

भारत में के-वेव की शुरुआत लॉकडाउन के दौरान नेटफ्लिक्स और यूट्यूब जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से हुई। लॉकडाउन में सभी अपने  घरों में कैद हो गए थे, ऐसे में ओटीटी इस दौरान मनोरंजन का बेहतरीन साधन बना। इस समय कोरियन ड्रामा और फिल्मों की व्यूअरशिप में 370% का उछाल देखा गया और इसके बाद यह ट्रेंड लगातार मजबूत होता गया।

भारत में कोरियन कंटेंट देखने वालों की संख्या में हर साल 30% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्क्विड गेम और माई गर्लफ्रेंड इज एन एलियन जैसे शोज ने भारतीय दर्शकों को कोरियाई कहानियों की सादगी और भावनाओं से जोड़ा। इतना ही नहीं, के-पॉप का क्रेज भी युवाओं में खूब देखने को मिल रहा है। बीटीएस जैसे बैन्ड्स के फैन्स आपको सिर्फ शहरों में ही नहीं, बल्कि गांवों में भी मिल जाएंगे।

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