लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड के उगरा गांव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले 14 वर्षों से शुरू होने का इंतजार कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं की आस लगाए ग्रामीणों को हर बार केवल आश्वासन ही मिला, लेकिन अस्पताल आज तक चालू नहीं हो सका।
हालत यह है कि करोड़ों की लागत से बने स्वास्थ्य केंद्र भवन, स्वास्थ्यकर्मी आवास और अन्य संरचनाएं उपयोग के अभाव में धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं।
अस्पताल में नियमित स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं हो सकी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि अस्पताल शुरू होने से उन्हें इलाज के लिए सेन्हा सीएचसी और सदर अस्पताल लोहरदगा का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। लेकिन निर्माण पूरा होने के वर्षों बाद भी अस्पताल में नियमित स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं हो सकी।
बेहतर मरम्मत और रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च हुए हैं, बावजूद इसके अस्पताल परिसर की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। सामान चोरी हो रहे हैं। भवन की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं, खिड़कियां और दरवाजे टूट चुके हैं, जबकि परिसर में जगह-जगह झाड़ियां उग आई हैं।
आवास भी लंबे समय से खाली पड़े
स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बनाए गए आवास भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उगरा के लिए एक महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति भी की गई है, लेकिन वर्तमान में डाक्टर और मेडिकल स्टाफ सेन्हा सीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कार्यरत हैं।
डॉक्टर तो 48 घंटे की ड्यूटी सेन्हा सीएचसी में दे रही है। इसके अलावे आवश्यकता अनुसार आयुष्मान आरोग्य मंदिर उगरा में भी डा. श्रेया सेवा देती हैं। ऐसे में उगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यहां पर स्थिति चिंताजनक है।


