भारत सरकार के मिशन ‘अन्वेषण’ के अंतर्गत आयल इंडिया एवं अल्फा जिओ इंडिया लिमिटेड कंपनी की टीम को 2-डी भूकंपीय सर्वे में जिले में पांच जगह पर हाइड्रोकार्बन (तेल एवं गैस) संरचना के संभावित संकेत मिले हैं। अलग-अलग 20 स्थानों पर खोदाई कराई गई थी। आरंभिक डाटा को पुष्टि के लिए देहरादून की लैब में भेजा गया है। पुष्टि के बाद नए सिरे से कार्य कराया जाएगा।
अल्फा जिओ इंडिया लिमिटेड कंपनी के इंजीनियर्स ने जिले में 20 स्थानों पर की थी खोदाई
मिशन अन्वेषण के अंतर्गत भारत सरकार ने गंगा-पंजाब बेसिन क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन की खोज के लिए जनवरी 2026 से अप्रैल तक जिले में 20 अलग-अलग स्थानों पर 2-डी भूकंपी सर्वे कराया था। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में सदर तहसील क्षेत्र में कार्य पूर्ण हुआ।
पांच जगह संभावित संकेत मिले, देहरादून की लैब को भेजी गई आरंभिक रिपोर्ट, फिर होगा काम
कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम दिवाकर ने बताया कि पांच जगह पर सकारात्मक संभावित संकेत मिले हैं। इनमें औडेन्य क्षेत्र में तीन, नगला जुला के दूर एक और सुल्तानगंज क्षेत्र में एक शामिल है। पूरी लोकेशन को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। जमीन के नीचे कंपनित बल, भूकंपीय तरंगों और डाटा प्रोसेसिंग के माध्यम से मिली संपूर्ण जानकारी को देहरादून की लैब के लिए भेजा गया है। अब रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया आरंभ हो पाएगी।
2025 में ही हो गया था सैटेलाइट सर्वे
जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार वर्ष 2025 में ही भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के 44 जिलों में सेटेलाइट सर्वे कराया गया था। सर्वे में संकेत मिलने के बाद ही खोदाई और ग्राउंड सर्वे कराया गया है। बलिया जिले में भी सकारात्मक संकेत मिले थे। बलिया के बाद मैनपुरी का सिस्मोग्राफिक डाटा अच्छा आया है। यहां हाइड्रोकार्बन की संभावना अच्छी है।
इन क्षेत्रों में भी कराई गई थी खाेदाई
कुरावली तहसील क्षेत्र के गांव हाफिजपुर, बेवर क्षेत्र के गांव गग्गरवाला, बिछवां क्षेत्र के गांव अलूपुरा, मैनपुरी में औडेन्य, औंछा आदि।


