उत्तराखंड विस चुनावों में महज सात माह, कांग्रेस में अंदरूनी घमासान; इस नेता को हटाने पर जोर

अगले विधानसभा चुनाव में अब लगभग सात माह का ही समय शेष रह गया है, लेकिन कांग्रेस के भीतर गुटीय खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को हटाने के नाम पर ठगी के प्रकरण के बाद पार्टी में अंदरखाने वरिष्ठ नेताओं में चल रही वर्चस्व की जंग सतह पर आ गई है। इसके कारण अब प्रदेश कांग्रेस की नई कार्यकारिणी घोषित करने समेत कई कदम प्रभावित हो सकते हैं।

अब बचे बस सात महीने

उत्तराखंड में कांग्रेस पिछले दो विधानसभा चुनावों में बड़ी हार का मुंह देख चुकी है। लगातार जनाधार कम होने से चिंतित पार्टी हाईकमान ने संगठन को मजबूती देने के लिए कई कदम उठाए हैं। बीते नवंबर माह यानी लगभग सात महीने पहले पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष की कमान गणेश गोदियाल को सौंपी।साथ में प्रदेश चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष प्रीतम सिंह एवं प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष डा हरक सिंह रावत को बनाया गया। इस पूरी कवायद में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की आगामी चुनाव के दृष्टिगत कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिली। यह अलग बात है कि प्रदेश संगठन में फेरबदल में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की भूमिका को माना गया।

अगले विधानसभा चुनाव में अब अधिक समय शेष नहीं है, ऐसे में अंतर्कलह सतह पर आने से पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कांग्रेस के सामने उत्तराखंड में भाजपा के अभेद्य समझे जाने वाले किले में सेंध लगाने की बड़ी चुनौती है।

हाईकमान का जोर इस पर है कि प्रदेश के दिग्गज नेता एकजुटता से पार्टी को जीत दिलाने में भूमिका निभाएं। लेकिन, चुनाव से पहले ही प्रदेश अध्यक्ष को बदलने का खेल सामने आने से पार्टी में हडकंप है। कुछ दिन पहले एक महिला नेत्री ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को निशाने पर लिया था। यह महिला नेत्री भले ही कांग्रेस से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं है, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके मजबूत संबंध रहे हैं।

ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की कवायद को चुनाव से पहले पार्टी के भीतर वर्चस्व हासिल करने से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है इस पूरे प्रकरण में वरिष्ठ नेताओं के आडियो की बात भी सामने आई है। आडियो के आधार पर यह मामला और उलझता नजर आ सकता है।

गणेश गोदियाल को अध्यक्ष बने हुए कई माह हो चुके हैं, लेकिन अब तक प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। खींचतान की इस नई पटकथा के सामने आने के बाद यह प्रकरण और लटकता दिखाई दे सकता है।

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