हापुड़ में खाद के नाम पर खेतों में डाला जा रहा ‘जहर’, 20 रुपये की राजस्थानी मिट्टी से बर्बाद हो रहे किसान

 जिले में नकली फर्टिलाइजर का कारोबार खतरनाक स्तर पर फैलता जा रहा है। हाल के दिनों में प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई में चौंकाने वाला पर्दाफास हुआ है।

बीस रुपये की लागत वाली राजस्थान की मिट्टी और औद्योगिक राख से तैयार कर एक हजार रुपये तक का नकली उर्वरक बाजार में बेचा जा रहा है। यह खेल न केवल किसानों की जेब पर डाका डाल रहा है, बल्कि जमीन की उर्वरता को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, पहले यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी के मामले सामने आए थे। इसके बाद दोयमी रोड पर नकली उर्वरक पैकिंग से जुड़ा बड़ा नेटवर्क पकड़ा गया। पिछले दिनों मोदीनगर रोड स्थित गोदामों पर छापेमारी में भारी मात्रा में तैयार नकली उर्वरक और कच्चा माल बरामद किया गया।

20 रुपये का बोला, हजार रुपये में बेच रहे

जांच में सामने आया कि राजस्थान के उद्योगों से निकलने वाली राख और वहां की सस्ती मिट्टी का उपयोग इस ‘उर्वरक’ को बनाने में किया जा रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कच्चे माल की लागत अधिकतम 20 रुपये प्रति बोरा है, जबकि इसे ब्रांडेड उर्वरक के नाम पर 800 से 1000 रुपये तक में बेचा जा रहा है।

इतना ही नहीं, यह नकली उर्वरक पंजीकृत और लाइसेंस प्राप्त दुकानों के जरिए किसानों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे पूरे नेटवर्क की गहराई का अंदाजा लगाया जा सकता है।

फसल पर पड़ रहा विपरीत असर

स्थानीय किसानों का कहना है कि इस तरह के उर्वरक के इस्तेमाल से फसल पर विपरीत असर पड़ रहा है। उत्पादन घट रहा है और मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब हो रही है। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग प्रभावी निरीक्षण और कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

मेरठ रोड स्थित धीरखेड़ा क्षेत्र में इस अवैध कारोबार के बड़े स्तर पर संचालित होने की शिकायतें सामने आई हैं। इस मामले की शिकायत शासन तक भी पहुंच चुकी है, लेकिन अभी तक ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश का कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई, तो यह समस्या कृषि व्यवस्था के लिए गंभीर संकट बन सकती है।

हम नियमित जांच, सख्त कार्रवाई और जागरूकता अभियान के जरिए इस काले कारोबार पर नियंत्रित करने की योजना तैयार कर रहे हैं, जिससे किसानों को ठगी और नुकसान से बचाया जा सके।

यह क्षेत्र मेरठ जिले में पड़ता है। ऐसे में वहां के अधिकारियों के साथ मिलकर जांच की जाएगी। इस क्षेत्र की जांच का अधिकार हापुड़ के अधिकारियों को भी होना चाहिए।

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