बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचने का मामला, नवीन पटनायक ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखकर की बड़ी मांग

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 ओडिशा के केंदुझर जिले में हुए कंकाल प्रकरण को लेकर नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है। इस घटना में एक बुजुर्ग व्यक्ति को अपनी बहन की मौत साबित करने के लिए उसका कंकाल बैंक तक ले जाना पड़ा, क्योंकि वह उसकी जमा राशि नहीं निकाल पा रहा था।

नवीन पटनायक ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर बैंकिंग व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लिखा, “मैं यह लेटर बहुत दुख और जल्दी से लिख रहा हूं, ताकि 27 अप्रैल को क्योंझर जिले में ओडिशा ग्राम्य बैंक की मल्लिपोसी ब्रांच में हुई एक चौंकाने वाली घटना को सामने ला सकूं।”

उन्होंने पत्र में बताया कि एक आदिवासी नागरिक (जीतू मुंडा) को अपनी बहन का कंकाल निकालकर उसकी मौत के सबूत के तौर पर बैंक ले जाना पड़ा, ताकि वे अपना हक का पैसा निकाल सकें। यह तब हुआ जब वे बैंक के कई बार चक्कर लगाने के बाद भी अधिकारियों से कोई मदद या जानकारी नहीं ले पाए।

इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक इस अमानवीय व्यवहार को RBI की गाइडलाइंस का पालन करने का हवाला देकर सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। यह बैंक अधिकारियों की तरफ से नियमों के पीछे छिपने और उन्हीं लोगों को छोड़ने की परेशान करने वाली मंशा दिखाता है, जिनकी वे सेवा करने के लिए बने हैं।

बैंकिंग व्यवस्था में सुधार की मांग

नवीन पटनायक ने लिखा कि यह दोहराने की जरूरत नहीं है कि डेमोक्रेसी में नियम लोगों को मजबूत बनाने के लिए होते हैं, उन्हें बेइज़्जत करने के लिए नहीं। इस डरावनी घटना ने पूरे ओडिशा में लोगों की भावनाओं को भड़का दिया है और न्यूयॉर्क पोस्ट और BBC जैसे इंटरनेशनल मीडिया का भी ध्यान खींचा है।

उन्होंने कहा कि यह घटना भले ही एक अकेली घटना हो, लेकिन इससे हमें एक सीख मिलती है कि हमें एक ज़्यादा ‘मानवीय बैंकिंग व्यवस्था’ लागू करनी चाहिए, खासकर दूरदराज के आदिवासी इलाकों में।

तय की जाए जवाबदेही: पटनायक

नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि शुरुआत के तौर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि इस चौंकाने वाली चूक के लिए तुरंत जवाबदेही तय की जाए। इससे सभी ग्रामीण बैंकों को एक साफ संदेश जाएगा कि वे सहानुभूति और करुणा के साथ नागरिक-केंद्रित सेवाएं देना सुनिश्चित करें।

अंत में पटनायक ने लिखा, “मैडम, मुझे पूरा यकीन है कि आपके दयालु हस्तक्षेप से नागरिकों के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार देश में कहीं और नहीं दोहराया जाएगा।”

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