जो काम कहीं नहीं होता है, उसे कुमाऊं विश्वविद्यालय का सिस्टम कर दिखाता है। बीकॉम ऑनर्स पाठ्यक्रम के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीच सत्र में वाणिज्य संकाय के इस पाठ्यक्रम का स्वरूप बदल दिया है। तीन वर्षीय कोर्स में बदलाव करते हुए ऑनर्स शब्द को हटाया गया है। अब इस प्रोफेशनल पाठ्यक्रम को करने वाले विद्यार्थियों को ऑनर्स की डिग्री नहीं मिलेगी। बल्कि, बैंकिंग एंड फाइनेंस, टैक्स प्लानिंग एंड मैनेजमेंट या एकाउंटिंग एंड फाइनेंस में चुने गए विशेषज्ञता क्षेत्र में स्नातक कॉमर्स की उपाधि दी जाएगी।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) में चार वर्षीय स्नातक में आनर्स डिग्री देने का प्रविधान किए जाने का हवाला देते हुए संशोधन की बात कही जा रही है। ऐसे में चार साल सामान्य बीकाम करने वालों को आनर्स की उपाधि मिलेगी। लेकिन, कुवि ने इस वर्ष छात्र-छात्राओं को बीकॉम ऑनर्स में प्रवेश दिए थे।
सत्र के बीच में संशोधन किए जाने पर प्राध्यापकों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय के अधिकारी अकादमिक समिति से परिवर्तन का प्रस्ताव पास होने की बात कह रहे हैं। मगर, कॉलेजों को बदलाव से संबंधित पत्र भेजा गया है।
महिला महाविद्यालय आनर्स कोर्स वाला एकमात्र सरकारी कॉलेज
कुमाऊं विश्वविद्यालय 11 कॉलेजों में बीकॉम ऑनर्स पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। जिसमें 15 सौ से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। महिला महाविद्यालय प्रदेश का एकमात्र सरकारी कॉलेज है, जहां ऑनर्स कोर्स चल रहा है। इसके अलावा कुवि के डीएसबी परिसर में पाठ्यक्रम संचालित है। जबकि, विश्वविद्यालय से संबद्ध नौ निजी संस्थानों में ऑनर्स पाठ्यक्रम चल रहा है।
विद्यार्थियों को पहले सेमेस्टर में ही चुनना होगा विशेषज्ञता क्षेत्र
बीकॉम ऑनर्स का पाठ्यक्रम सामान्य बीकॉम से बिल्कुल अलग है। सामान्य यूजी कॉमर्स में सत्र अनुसार अलग पेपर निर्धारित हैं। जबकि, ऑनर्स में बैंकिंग एंड फाइनेंस, टैक्स प्लानिंग एंड मैनेजमेंट और एकाउंटिंग एंड फाइनेंस के अनुसार पाठ्यक्रम डिजाइन किया है। प्रथम सेमेस्टर में छात्र-छात्राओं को विशेषज्ञता का चयन करना होता है। इसी के अनुसार उनकी पढ़ाई होती है।


