अब लंबी लाइनों का दौर खत्म; सूरत में शुरू हुआ बैरियर-फ्री टोल प्लाजा, देखें कैसे करता है काम

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने हाल ही में कहा है कि भारत 2026 के अंत तक पूरी तरह से टोल बैरियर मुक्त हो जाएगा। इसका मतलब है कि टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। भारत का पहला बैरियर-फ्री टोल गुजरात के सूरत में चौर्यासी टोल प्लाजा पर सफलतापूर्वक लगाया गया है।

यह कैसे काम करता है?

बैरियर-फ्री टोल सिस्टम मल्टी लेन फ्री फ्लो तकनीक पर काम करता है। यह हाईवे पर ट्रैफिक की रफ्तार को रोके बिना अपने आप टोल फीस काट लेता है। MLFF टोलिंग सिस्टम में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें RFID रीडर्स और ANPR कैमरे शामिल हैं। आइए देखते हैं कि भारत में बैरियर-फ्री टोल सिस्टम कैसे काम करता है।

देश का पहला बैरियर-फ्री टोल

हाल ही में सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर ANI ने भारत के पहले बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम का एक वीडियो शेयर किया गया है। यह सिस्टम गुजरात के सूरत में NH-48 पर स्थित चौर्यासी टोल प्लाजा पर लागू किया गया है। ANI द्वारा शेयर किए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सड़क के ऊपर एक फ्रेम लगा है। इस फ्रेम में RFID रीडर्स, कैमरे और अन्य सेंसर्स लगाए गए हैं।

क्या है बैरियर-फ्री टोल प्लाजा?

पुराने टोल प्लाजा पर टोल टैक्स काटने के लिए लोहे के बैरियर का इस्तेमाल होता है जो गाड़ीयों को रोकता है। वहां कैमरे के जरिए FASTag से पैसे काटते हैं या गाड़ी का मालिक UPI से भुगतान करता है। इस वजह से टोल प्लाजा पर गाड़यों की लंबी कतारें लग जाती हैं और ट्रैफिर की रफ्तार रुक जाती है। Barrier Free Toll Plaza मल्टी-लेन फ्री फ्लो पर आधारित है।

इसमें सड़क के ऊपर लगे फ्रेम में सेंसर और कैमरे लगे होते हैं। ये चलते हुए गाड़ियों की पहचान कर लेते हैं और ट्रैफिक को रोके बिना अपने आप पैसे काट लेते हैं।

कलेक्शन कैसे काम करता है?

जैसे ही कोई गाड़ी वहां से गुजरती है तो सेंसर उसकी पहचान कर लेता है और हाई-परफॉर्मेंस वाले AI कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं। इसी दौरान RFID सेंसर गाड़ी के FASTag को स्कैन करते हैं और लिंक किए गए बैंक खाते से अपने आप पैसे काट लेते हैं। अगर किसी गाड़ी में FASTag काम नहीं कर रहा है या गाड़ी पर फास्टैग नहीं लगा है तो कैमरा नंबर प्लेट के जरिए गाड़ी की पहचान कर मालिक को ई-नोटिस भेज देता है।

क्या है इसके फायदे?

गाड़ियां बिना रुके या रफ्तार कम किए टोल पॉइंट से 80kmph की स्पीड से गुजर सकती हैं। इससे टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत खत्म हो जाएगी और भीड़ कम होगी जिससे हाईवे पर यात्रा के समय में भी बचत होगी। बैरियर-फ्री टोल का एक और फायदा यह है कि इससे ईंधन की बचत होगी क्योंकि गाड़ियों को टोल पर रुकने और इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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