अदालत ने कहा कि एफआइआर और धारा 183 के बयानों में भारी विरोधाभास अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा करता है। जमानत की शर्तों के तहत आरोपित को पुलिस जांच में सहयोग करने और गवाहों को न डराने के निर्देश दिए गए हैं।