इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि सहमति से लंबे समय तक शारीरिक संबंध को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए आजमगढ़ के सिधारी थाने में दर्ज मामले में आरोपित बनसराज यादव की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली है।
कोर्ट ने कहा- पीड़िता और आरोपित याची के बीच के संबंध प्रथम दृष्टया आपसी सहमति पर आधारित प्रतीत होते हैं। पीड़िता जो 35 वर्षीय विधवा है, ने अपने बयान में स्वीकार किया था कि वह वर्ष 2022 से आरोपित के साथ फोन पर बातचीत कर रही थी और उनके बीच शारीरिक संबंध थे।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि एफआइआर में आरोपित पर डरा-धमकाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था, लेकिन पीड़िता का मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया बयान और मेडिकल जांच के दौरान डाक्टर को दी गई जानकारी अलग ही कहानी बयां करती हैं, जिसमें दोनों के बीच प्रेम संबंध होने का संकेत मिलता है।
अदालत ने कहा कि एफआइआर और धारा 183 के बयानों में भारी विरोधाभास अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा करता है। जमानत की शर्तों के तहत आरोपित को पुलिस जांच में सहयोग करने और गवाहों को न डराने के निर्देश दिए गए हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

